साध्वी त्रिकाल भवंता ने भोजशाला पर कोर्ट के फैसले का किया स्वागत, कहा-जाग चुका है हिंदू समाज
नासिक, 16 मई (आईएएनएस)। साध्वी त्रिकाल भवंता (अनिता शर्मा) ने भोजशाला मामले पर अदालत के फैसले का स्वागत किया और कुंभ मेले की व्यवस्थाओं को लेकर अपने विचार आईएएनएस के साथ शेयर किए, जिसमें महिला अखाड़ों की भागीदारी से जुड़ी मांगें भी शामिल थीं।
उन्होंने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, "हम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हैं, क्योंकि हिंदू धर्म को बहुत पहले से राजनीति और कई विभिन्न रास्तों के तहत दबाया गया है और अब जो भी हो रहा है, उससे हिंदू जाग गया है। साथ ही, अपने अधिकारों और जहां भी मंदिर, यज्ञशाला, आश्रम, परी अखाड़ा और पंचभूत अखाड़ा हैं, सब लोग मिलकर हमारे सनातन धर्म की रक्षा करेंगे। अपने अधिकार को पाने के लिए हमारा अखाड़ा हर तरह के संघर्ष करेगा। हम सरकार से ऐसी मांग करते हैं कि जो मिला, उसका संरक्षण करना चाहिए।"
नासिक और त्र्यंबकेश्वर (महाराष्ट्र) में कुंभ मेला आयोजित होने जा रहा है, जिसकी शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 से होगी। साध्वी त्रिकाल भवंता ने आगामी कुंभ मेले को लेकर कहा, "आद्य जगतगुरु शंकराचार्य, त्रिकाल भवंत सरस्वती जी महाराज (जो गायत्री त्रिवेणी प्रयाग पीठ की पीठाधीश्वर और परी अखाड़े की प्रमुख हैं) के सानिध्य में कुंभ मेले की तैयारियां जोरो-शोरों से चल रही हैं। नासिक त्र्यंबकेश्वर में अगला सिंहस्थ कुंभ मेला साल 2027-28 में होने वाला है। इसकी शुरुआत और तैयारियों के तहत 31 अक्टूबर 2026 को ध्वजारोहण किया जाएगा।"
उन्होंने आगे बताया कि परी अखाड़ा के बाद श्री पंचभूत अखाड़ा (जो पूरी तरह से महिलाओं के काम करता है) पूरी तरह से तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, "यह सभी लोग एक मिशन के तहत कार्य करने के लिए तैयार हैं।"
साध्वी त्रिकाल भवंता ने प्रशासन से महिला साधवियों की सुविधा के लिए मांग करते हुए कहा, "इस कुंभ में हमारी प्रशासन, सीएम, माननीय रेल मंत्री और अधिकारियों से मांग है कि महिलाओं की साधवियों को पूरी तरह सुरक्षा सुविधा और अमृत स्नान की व्यवस्था करवाई जाए, जिससे हमारी देश-विदेश से साध्वी पदाधिकारी महामंडलेश्वर जगतगुरु भयमुक्त होकर अपनी साधना पूजा कर सकें।"
--आईएएनएस
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