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भीषण गर्मी और उमस से लोगों को हाल बेहाल, मौसम विभाग ने बदलाव के दिए संकेत

नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। देश के कई राज्यों में इस समय मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। कहीं भीषण गर्मी और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है तो कहीं तेज आंधी और तूफान ने भारी तबाही मचाई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से लेकर महाराष्ट्र के विदर्भ और बिहार के भागलपुर तक मौसम का असर साफ दिखाई दे रहा है। इस बीच मौसम विभाग और विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
भीषण गर्मी और उमस से लोगों को हाल बेहाल, मौसम विभाग ने बदलाव के दिए संकेत

नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। देश के कई राज्यों में इस समय मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। कहीं भीषण गर्मी और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही है तो कहीं तेज आंधी और तूफान ने भारी तबाही मचाई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से लेकर महाराष्ट्र के विदर्भ और बिहार के भागलपुर तक मौसम का असर साफ दिखाई दे रहा है। इस बीच मौसम विभाग और विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

कानपुर में इन दिनों तेज गर्मी और उमस ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। इंसानों के साथ-साथ जानवरों और पक्षियों पर भी इसका असर पड़ रहा है। इसी को देखते हुए कानपुर जू में जानवरों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। चिड़ियाघर प्रशासन जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए कूलर, शॉवर, बर्फ और ठंडे पानी जैसी व्यवस्थाएं कर रहा है।

मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडे ने बताया कि इस समय उत्तर भारत और उत्तर प्रदेश में नमी का फ्लो लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते कई जगहों पर बादल बन रहे हैं, तेज हवाएं चल रही हैं और गरज-चमक के साथ बारिश की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुछ जगहों पर बिजली गिरने और ओलावृष्टि की भी संभावना बनी हुई है। हालांकि, तापमान में एक से दो डिग्री की गिरावट हो सकती है, लेकिन उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान करती रहेगी।

डॉक्टर पांडे ने कहा कि यूवी इंडेक्स और हीट स्ट्रेस लगातार बढ़ा हुआ है, जो इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक बहुत जरूरी न हो तो बाहर निकलने से बचें। अगर बाहर निकलना जरूरी हो तो पानी पीकर निकलें और अपने साथ पानी जरूर रखें। उन्होंने खासतौर पर किसानों, मजदूरों, रिक्शा चालकों और धूप में काम करने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी, क्योंकि लगातार धूप में काम करने से हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अगले 48 घंटों में केरल में मानसून पहुंचने की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। हालांकि इस बार अल नीनो के असर की वजह से मानसून कमजोर रहने की आशंका जताई जा रही है और सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान पहले ही लगाया जा चुका है।

उधर, महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में भी हीटवेव का असर जारी है। पुणे स्थित क्लाइमेट रिसर्च सेंटर के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एसडी सनप ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों से विदर्भ में गर्म हवाएं चल रही हैं। हालांकि, 28 तारीख के बाद वहां गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है, जिससे लोगों को राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि तापमान में दो से तीन डिग्री तक गिरावट आ सकती है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, महाराष्ट्र के बाकी हिस्सों में फिलहाल हीटवेव जैसी स्थिति नहीं है, क्योंकि कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री से नीचे बना हुआ है। एसडी सनप ने बताया कि शहरों में कंक्रीट की इमारतें, सीमेंटेड सड़कें, वाहनों और उद्योगों से निकलने वाली गर्मी तापमान को बढ़ा देती है। यही वजह है कि शहरों में आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में तापमान दो से तीन डिग्री ज्यादा महसूस होता है।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे मौसम विभाग के मौसम ऐप और कृषि विभाग की एडवाइजरी पर नजर रखें ताकि बदलते मौसम के हिसाब से खेती से जुड़े फैसले लिए जा सकें।

वहीं, बिहार के भागलपुर में तेज तूफान ने भारी नुकसान पहुंचाया है। भागलपुर के डीएम नवल किशोर चौधरी ने बताया कि सोमवार देर रात करीब 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान ने पूरे इलाके को प्रभावित किया। तेज आंधी के कारण बड़ी संख्या में पेड़ गिर गए, सड़कें बंद हो गईं और बिजली व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई।

डीएम ने बताया कि रात 12 बजे से ही नगर निगम, बिजली विभाग, वन विभाग और प्रशासन की टीमें राहत और बहाली के काम में जुटी हुई हैं। ज्यादातर सड़कों से पेड़ हटाकर रास्ता साफ कर दिया गया है, जबकि बिजली आपूर्ति बहाल करने का काम तेजी से चल रहा है। कई बड़े पेड़ बिजली के तारों पर गिर गए थे, जिन्हें काटकर हटाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल किसी बड़े हादसे या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। हालांकि सरकारी परिसरों और दफ्तरों में भी काफी नुकसान हुआ है। कई जगह सोलर प्लेटें टूट गईं और इमारतों को नुकसान पहुंचा है।

--आईएएनएस

पीआईएम/डीकेपी

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