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भारतीय सेना को मिली 2,000 स्वदेशी ‘प्रहार’, एलएमजी 1 किमी तक दुश्मन को करेगी ढेर

नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारतीय सेना लगातार अपने हथियारों को आधुनिक बना रही है। इसी दिशा में 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत बनी ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन (एलएमजी) की पहली खेप सेना को सौंप दी गई है। अब पुरानी 5.56×45 मिमी इंसास एलएमजी की जगह नई 7.62×51 मिमी ‘प्रहार’ एलएमजी को शामिल किया जा रहा है।
भारतीय सेना को मिली 2,000 स्वदेशी ‘प्रहार’, एलएमजी 1 किमी तक दुश्मन को करेगी ढेर

नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारतीय सेना लगातार अपने हथियारों को आधुनिक बना रही है। इसी दिशा में 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत बनी ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन (एलएमजी) की पहली खेप सेना को सौंप दी गई है। अब पुरानी 5.56×45 मिमी इंसास एलएमजी की जगह नई 7.62×51 मिमी ‘प्रहार’ एलएमजी को शामिल किया जा रहा है।

हालांकि इस समय एलएसी और एलओसी पर स्थिति अपेक्षाकृत शांत है, लेकिन सुरक्षा को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही है। सेना अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के लिए पुराने हथियारों को तेजी से बदल रही है।

शनिवार को अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने 2,000 ‘प्रहार’ एलएमजी की पहली खेप भारतीय सेना को सौंपी। यह डिलीवरी ग्वालियर स्थित अदाणी स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स से रवाना की गई। इस मौके पर रक्षा मंत्रालय और कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष राजवंशी ने इसे 'मेक इन इंडिया' के तहत एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि 41,000 एलएमजी की आपूर्ति के लिए सात साल का समय निर्धारित था, लेकिन कंपनी इसे तीन साल से भी कम समय में पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। पहले चरण में 2,000 एलएमजी समय से 11 महीने पहले ही सौंप दी गई हैं।

उन्होंने बताया कि कंपनी हर महीने लगभग 1,000 एलएमजी बनाने की क्षमता हासिल कर रही है। आने वाले 12 महीनों में 12,000 एलएमजी और 18,000 कार्बाइन देने की योजना है। ग्वालियर की फैक्ट्री से कुल 30,000 हथियारों का निर्माण और आपूर्ति करना एक बड़ी उपलब्धि होगी।

रक्षा मंत्रालय के अधिग्रहण महानिदेशक ए. अंबरासु ने कहा कि तय समय से पहले डिलीवरी होना भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। उन्होंने यह भी बताया कि रक्षा खरीद प्रक्रिया में बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे उद्योग को और मजबूती मिलेगी।

ग्वालियर स्थित संयंत्र में हर साल करीब एक लाख हथियार बनाने की क्षमता है, जिनमें लगभग 90 प्रतिशत सामग्री स्वदेशी है।

‘प्रहार’ एलएमजी की विशेषताओं की बात करें तो इसकी मारक क्षमता काफी प्रभावी है। इसकी रेंज लगभग 1,000 मीटर है। यह एक मिनट में करीब 700 गोलियां दाग सकती है। इसमें 120 राउंड का ड्रम मैगजीन और बेल्ट फीड दोनों विकल्प उपलब्ध हैं। इसे कुछ ही सेकंड में दोबारा लोड किया जा सकता है। इसका वजन करीब 8 किलोग्राम है और इसे जमीन के साथ-साथ वाहनों और हेलीकॉप्टरों से भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फायरिंग के दौरान इससे लगने वाला झटका (रिकॉइल) भी कम है।

भारतीय सेना ने वर्ष 2019 में 40,000 से अधिक एलएमजी की खरीद के लिए प्रस्ताव जारी किया था, जबकि इसका अनुबंध 2024 में किया गया।

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी

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