भारतीय ग्रैंडमास्टर प्रणेश एम. ने 'कनिजसा ओपन 2026' का खिताब जीता
नई दिल्ली, 23 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय ग्रैंडमास्टर प्रणेश एम. ने हंगरी के नागीकानिजा में हुए प्रतिष्ठित 'कनिजा ओपन 2026' का खिताब अपने नाम कर लिया है। प्रणेश ने रोमांचक 9वें राउंड के बाद टूर्नामेंट में पहला स्थान हासिल किया।
मध्य यूरोप के सबसे कड़े और प्रतिस्पर्धी ओपन टूर्नामेंट्स में गिने जाने वाले इस आयोजन में प्रणेश का प्रदर्शन लाजवाब रहा। प्रणेश ने आखिरी दिन वादिम पेत्रोवस्की के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। उन्होंने 9 में से 7 अंक हासिल किए और फिर टाई-ब्रेकर में जीत दर्ज की। खेल जगत की तरफ से नए चैंपियन को इस अद्भुत विजय के लिए ढेरों बधाइयां दी जा रही हैं।
प्रणेश की यह जीत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय शतरंज के बढ़ते दबदबे का एक और बेहतरीन उदाहरण है। भारतीय प्रतिभा ने वैश्विक मंच पर शानदार चमक बिखेरी है और हंगरी भारतीय शतरंज के लिए लगातार सफलता का केंद्र बना हुआ है।
26 अगस्त 2006 को तमिलनाडु के कराईकुडी में जन्मे मुनिरेथिनम प्रणेश स्टॉकहोम में रिल्टन कप जीतने के बाद, जनवरी 2023 में वे भारत के 79वें ग्रैंडमास्टर बने थे। प्रणेश ने साल 2020 में दिल्ली जीएम ओपन में इंटरनेशनल मास्टर का टाइटल और पहला जीएम नॉर्म हासिल किया। इसके बाद उन्होंने साल 2023 में रिल्टन कप जीतकर भारत के 79वें ग्रैंडमास्टर बने। साल 2025 में प्रणेश ने चेन्नई ग्रैंड मास्टर्स में चैलेंजर्स सेक्शन जीता था।
बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली प्रणेश के पिता मुनिरेथियम कपड़े की दुकाम पर काम करते हैं, जबकि मां मनजुला आंगनबाड़ी में काम करती हैं। मां ही प्रणेश की पहली कोच भी रही हैं, जिन्होंने उन्हें शतरंज के खेल से परिचित करवाते हुए उन्हें इसके दांव-पेंच सिखाए थे।
जब माता-पिता ने शतरंज में प्रणेश की काबिलियत को पहचाना तो उन्हें एक चेस एकेडमी में दाखिला दिलवा दिया। प्रणेश के बड़े भाई दिनेशराजन भी एक चेस खिलाड़ी हैं, जिन्होंने प्रणेश की ट्रेनिंग में अहम रोल निभाया है।
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