भारतीय सेना ने गुवाहाटी में ‘अभ्यास जल राहत’ का आयोजन किया
गुवाहाटी, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय सेना ने असम में बाढ़ जैसी आपदा से निपटने की तैयारियों को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा संयुक्त अभ्यास आयोजित किया। गजराज कोर की रेड हॉर्न्स डिवीजन ने आईआईटी गुवाहाटी में ‘अभ्यास जल राहत’ नाम से यह बाढ़ राहत अभ्यास किया। इस अभ्यास में भारतीय सेना के साथ एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और एसएसबी की बाढ़ राहत टुकड़ियों ने हिस्सा लिया।
अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और भीषण बाढ़ की स्थिति में तेजी से राहत कार्य करने की क्षमता बढ़ाना था। अभ्यास के दौरान बाढ़ राहत के विभिन्न तरीकों को दिखाया गया। इसमें ड्रोन की मदद से निगरानी करना, बाढ़ में फंसे लोगों तक खाने-पीने का सामान पहुंचाना और डूबते हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने जैसे काम शामिल थे। सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने गहरे पानी में बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया। वास्तविक बाढ़ जैसी परिस्थितियों का अनुकरण करते हुए सभी एजेंसियों ने मिलकर काम किया।
इस अभ्यास ने सभी संबंधित एजेंसियों को राहत कार्यों को प्रभावी और सुव्यवस्थित तरीके से चलाने का व्यावहारिक अभ्यास कराया। इससे आपदा के समय विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सहयोग की क्षमता साफ तौर पर दिखाई दी। अभ्यास को गजराज कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला (एवीएसएम, एसएम) सहित सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य प्रशासन, एसएसबी, सीएपीएफ और आपदा राहत संगठनों के अधिकारियों ने देखा।
लगभग 800 दर्शकों ने भी इस अभ्यास को करीब से देखा। इनमें भारतीय सेना की बाढ़ राहत टुकड़ियां, एनसीसी और एनएसएस के कैडेट तथा गुवाहाटी के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राएं शामिल थे। लेफ्टिनेंट जनरल नीरज शुक्ला ने बाढ़ राहत टुकड़ियों की तैयारियों का जायजा लिया और सभी को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए ‘पूरे समाज’ के दृष्टिकोण को अपनाना जरूरी है। उन्होंने चार ‘पी’ के मंत्र पर जोर दिया – प्रेडिक्ट (अनुमान लगाना), प्रिपेयर (तैयारी करना), प्रोटेक्ट (सुरक्षा करना) और प्रोवाइड (उपलब्ध कराना)।
जनरल शुक्ला ने सेना, एसएसबी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और एनसीसी कैडेट्स से राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने विभिन्न एजेंसियों के बीच नियमित संयुक्त प्रशिक्षण, मानक संचालन प्रक्रियाओं को अपडेट करने और क्षमता निर्माण पर जोर दिया।
अभ्यास के दौरान दिखाए गए कार्यक्रमों ने दर्शकों के मन में सेना और अन्य राहत एजेंसियों के प्रति भरोसा और सुरक्षा की भावना जगाई। लोगों को यह विश्वास हुआ कि किसी भी प्राकृतिक आपदा में उनकी सुरक्षा के लिए सभी एजेंसियां तैयार हैं। ‘अभ्यास जल राहत’ का मूल मंत्र 'संगठित शक्ति से जन आपदा सुरक्षा' को इस अभ्यास ने और मजबूत किया है। अब भाग लेने वाली सभी एजेंसियां नियमित संयुक्त प्रशिक्षण जारी रखने और आपदा प्रबंधन को और बेहतर बनाने की प्रतिबद्धता जता चुकी हैं।
--आईएएनएस
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