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भारतीय सेना ने असम में द्वितीय विश्वयुद्ध के बम को निष्क्रिय किया, बड़ा खतरा टला

तेजपुर, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय सेना ने असम के लेखापानी क्षेत्र में दूसरे विश्व युद्ध के समय का एक खतरनाक बिना फटा हुआ बम (यूएक्सओ) को गुरुवार को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। इस कार्रवाई से एक घनी आबादी वाले इलाके में संभावित बड़ी दुर्घटना को टाल लिया गया।
भारतीय सेना ने असम में द्वितीय विश्वयुद्ध के बम को निष्क्रिय किया, बड़ा खतरा टला

तेजपुर, 30 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय सेना ने असम के लेखापानी क्षेत्र में दूसरे विश्व युद्ध के समय का एक खतरनाक बिना फटा हुआ बम (यूएक्सओ) को गुरुवार को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। इस कार्रवाई से एक घनी आबादी वाले इलाके में संभावित बड़ी दुर्घटना को टाल लिया गया।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, लेडो के लेखापानी इलाके में करीब 12 इंच लंबाई और 6 इंच व्यास वाला यह बिना फटा बम नागरिक बस्ती में मिला था। इतने पुराने और खतरनाक विस्फोटक के मिलने से स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई थी। तुरंत सूचना मिलते ही भारतीय सेना की 'रेड शील्ड सैपर्स' यूनिट की विशेष बम निरोधक टीम को मौके पर भेजा गया।

टीम ने अत्यंत तेजी और पेशेवर तरीके से कार्य करते हुए पहले पूरे इलाके को सुरक्षित किया। आसपास के निवासियों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार सख्त सुरक्षा घेरा बनाया गया।

बम को अत्यधिक सावधानी के साथ निष्क्रिय किया गया। इसके बाद उसे आबादी वाले क्षेत्र से दूर एक सुरक्षित जगह ले जाकर नियंत्रित विस्फोट के माध्यम से पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार की कोई क्षति या हानि नहीं हुई।

सेना के अधिकारियों ने बम निरोधक टीम के शानदार समन्वय, सटीकता और सुरक्षा प्रोटोकॉल के कड़े पालन की सराहना की। उन्होंने कहा कि समय पर की गई इस कार्रवाई से एक बड़ी तबाही टल गई, जो नागरिकों के लिए घातक साबित हो सकती थी।

यह घटना असम के उन कई इलाकों में से एक है, जहां दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश और जापानी सेनाओं के बीच हुए संघर्ष के अवशेष आज भी कभी-कभी मिलते रहते हैं। लेडो रोड क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि यहीं से स्टिलवेल रोड शुरू होती थी, जो युद्ध के समय सामरिक महत्व की थी।

--आईएएनएस

एससीएच

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