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भारतीय सेना के 14 इन्फैंट्री डिवीजन के तहत हिमालयी सीमा सुरक्षा पर महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित

नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय सेना की 14 इन्फैंट्री डिवीजन के तत्वावधान में 'हिमालय को मजबूत बनाना: चीनी आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए मध्य क्षेत्र में एक सक्रिय सैन्य-नागरिक विलय रणनीति' विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया जा रहा है।
भारतीय सेना के 14 इन्फैंट्री डिवीजन के तहत हिमालयी सीमा सुरक्षा पर महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित

नई दिल्ली, 3 जनवरी (आईएएनएस)। भारतीय सेना की 14 इन्फैंट्री डिवीजन के तत्वावधान में 'हिमालय को मजबूत बनाना: चीनी आक्रामकता का मुकाबला करने के लिए मध्य क्षेत्र में एक सक्रिय सैन्य-नागरिक विलय रणनीति' विषय पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया जा रहा है।

यह सेमिनार भारत-चीन सीमा के मध्य क्षेत्र, खासकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बढ़ते तनाव को देखते हुए रणनीतिक महत्व का है। हाल के वर्षों में भारत ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर इस क्षेत्र में अपनी तैयारी को मजबूत किया है।

ऐतिहासिक रूप से पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों की तुलना में कम संवेदनशील माने जाने वाले मध्य क्षेत्र ने अब चीन की ओर से बुनियादी ढांचे के तेज विकास और गश्ती बढ़ाने से रणनीतिक महत्व प्राप्त कर लिया है। सेमिनार का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि सैन्य और नागरिक संसाधनों का एकीकरण उत्तराखंड में सीमा सुरक्षा को कैसे नई दिशा दे सकता है। यह आयोजन विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सैन्य नेताओं के बीच विचारों के आदान-प्रदान का मंच बनेगा, जहां जटिल चुनौतियों पर गहन चर्चा होगी।

हिमालय सदियों से भारतीय सभ्यता की प्राकृतिक ढाल रहा है। यह सिर्फ भौगोलिक बाधा नहीं, बल्कि सुरक्षा और संप्रभुता का प्रतीक है। मध्य क्षेत्र पहले शांतिपूर्ण था, लेकिन अब चीनी आक्रामकता के नए पैटर्न जैसे सीमा पार बुनियादी ढांचा विकास, दोहरे उपयोग वाली सुविधाएं, सैनिकों की बढ़ती आवाजाही, आक्रामक गश्त और ग्रे-जोन गतिविधियां चुनौती पैदा कर रही हैं। इस क्षेत्र की मुश्किलें अलग हैं – कठिन इलाका, कम आबादी, सीमित कनेक्टिविटी, पर्यावरणीय संवेदनशीलता। इनका मुकाबला करने के लिए स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सैन्य-नागरिक सहयोग जरूरी है।

चीनी रणनीति अब सिर्फ सैन्य नहीं रही। इसमें साइबर जांच और सीमावर्ती गांवों का सैन्यीकरण भी शामिल है। भारत की जवाबी रणनीति बहुआयामी होनी चाहिए। सेना जमीन पर मजबूत है, लेकिन लंबे समय के लिए सिविल इंजीनियरिंग, डिजिटल तकनीक, उद्योग और शिक्षाविदों के साथ विलय जरूरी है। इसमें उन्नत संचार नेटवर्क, सेंसर सिस्टम तैनाती और सीमावर्ती समुदायों की भागीदारी शामिल है। लक्ष्य मध्य क्षेत्र को मजबूत लॉजिस्टिक्स और निगरानी आधार बनाना है, जो तेज प्रतिक्रिया सुनिश्चित करे।

इस सहयोग का एक बड़ा हिस्सा सीमावर्ती लोगों का सशक्तिकरण है। वे पहली नजर रखने वाले और प्राकृतिक निगरानी करने वाले हैं। बेहतर कनेक्टिविटी, आर्थिक अवसर, सूचना पहुंच, आपदा प्रबंधन और सैन्य गतिविधियों में भागीदारी से न केवल सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि इन क्षेत्रों का सामाजिक-आर्थिक विकास भी होगा।

--आईएएनएस

एसएचके/डीकेपी

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