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भारतीय नौसेना का हिस्सा बनेगा 'अंजदीप,' समुद्र में खोज निकालेगा दुश्मन का ठिकाना

नई दिल्ली, 23 फरवरी (आईएएनएस)। 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भारतीय नौसेना तेजी से आगे बढ़ रही है। एक के बाद एक नए स्वदेशी प्लेटफॉर्म नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 27 फरवरी को स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अंजदीप’ भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की मौजूदगी में चेन्नई पोर्ट पर इसे आधिकारिक तौर पर नौसेना का हिस्सा बनाया जाएगा।
भारतीय नौसेना का हिस्सा बनेगा 'अंजदीप,' समुद्र में खोज निकालेगा दुश्मन का ठिकाना

नई दिल्ली, 23 फरवरी (आईएएनएस)। 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भारतीय नौसेना तेजी से आगे बढ़ रही है। एक के बाद एक नए स्वदेशी प्लेटफॉर्म नौसेना में शामिल किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में 27 फरवरी को स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘अंजदीप’ भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की मौजूदगी में चेन्नई पोर्ट पर इसे आधिकारिक तौर पर नौसेना का हिस्सा बनाया जाएगा।

पाकिस्तान, चीन की मदद से अपनी सबमरीन फ्लीट की ताकत बढ़ा रहा है। पाकिस्तान ने चीन से कुल 8 हैंगर क्लास सबमरीन खरीदी हैं। इन सबमरीन से निपटने के लिए भारतीय नौसेना ने एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना पर काम तेज कर दिया था।

पहले तीन एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट- आईएनएस अर्णाला, आईएनएस अंद्रोत्त और आईएनएस माहे- पहले ही नौसेना में शामिल किए जा चुके हैं। आईएनएस ‘अंजदीप’ की खासियत यह है कि यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, एएसडब्ल्यू कॉम्बैट सूट, हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है। यह 25 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है और एक बार में लगभग 3,300 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है।

साल 2019 में 16 एएसडब्ल्यू शैलो वॉटर क्राफ्ट के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए गए थे। इनमें से 8 कोचिन शिपयार्ड में और 8 गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई), कोलकाता में बनाए जा रहे हैं।

एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट की विशेषता यह है कि यह तट से 100 से 150 नॉटिकल मील की दूरी तक दुश्मन की सबमरीन का पता लगाने में सक्षम है। सबमरीन का इस्तेमाल डिफेंसिव और ऑफेंसिव ऑपरेशनों में किया जाता है।

‘अंजदीप’ 30-40 मीटर की गहराई वाले क्षेत्रों में ऑपरेट करने वाली किसी भी सबमरीन को डिटेक्ट, ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम है। यह युद्धपोत नौसैनिक बंदरगाह से निकलने वाले बड़े युद्धपोतों के लिए समुद्री मार्ग को सुरक्षित और क्लियर करने का भी काम करता है।

--आईएएनएस

एमएस/

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