भारत-सूडान 9वां विदेश कार्यालय परामर्श, कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति
नई दिल्ली, 5 मई (आईएएनएस)। भारत और सूडान के बीच रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए 4 मई को पोर्ट सूडान में 9वां विदेश कार्यालय परामर्श आयोजित किया गया। इस बैठक में दोनों देशों ने आपसी सहयोग के कई अहम मुद्दों पर चर्चा की और साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत और सूडान 9वें विदेश कार्यालय परामर्श में भारतीय टीम का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी (डब्ल्यूएएनए) डॉ. एम. सुरेश कुमार ने किया। वहीं, सूडान की तरफ से विदेश मंत्रालय के अंडरसेक्रेटरी राजदूत माविया उस्मान खालिद मोहम्मद ने नेतृत्व किया।
बैठक में दोनों देशों ने राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, खनन, खेती, छोटे और मझोले उद्योग (एसएमईएस), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और लोगों के बीच संबंध जैसे मुद्दों पर बात की। साथ ही इन रिश्तों को और मजबूत कैसे बनाया जाए? इस पर भी चर्चा हुई।
इस दौरान सूडान ने भारत में पिछले साल हुए पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा दोहराई। दोनों देशों ने आतंकवाद के खतरे से मिलकर लड़ने का संकल्प भी लिया।
दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए। सूडान ने भारत की क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास में मदद की सराहना की, खासकर आईटीईसी प्रोग्राम और आईसीसीआर स्कॉलरशिप के जरिए। दोनों ने सहयोग की भावना के तहत इस सहयोग को और बढ़ाने पर सहमति जताई।
इस दौरे के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सूडान के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हैथम मोहम्मद इब्राहिम से भी मुलाकात की। मंत्री ने भारत की मानवीय सहायता और स्वास्थ्य क्षेत्र में चल रहे सहयोग की तारीफ की, जिसमें हाल ही में लगाया गया कृत्रिम अंग शिविर भी शामिल है। प्रतिनिधिमंडल ने रेड सी राज्य के गवर्नर मुस्तफा मोहम्मद नूर से भी मुलाकात की।
अंत में दोनों देशों ने तय किया कि विदेश कार्यालय परामर्श का अगला दौर आपसी सहमति से नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
भारत और सूडान के बीच रिश्ते बहुत पुराने समय से हैं। लगभग 5,000 साल पहले मेसोपोटामिया के जरिए नीलोटिक और सिंधु घाटी सभ्यताओं के बीच संपर्क और शायद व्यापार होता था। सूडान में भारतीय दूतावास के मुताबिक, 1953 में पहले सूडानी संसदीय चुनाव सुकुमार सेन ने कराए थे, जो उस समय भारत के चीफ इलेक्शन कमिश्नर थे।
--आईएएनएस
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