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'भारत सरकार नागा मुद्दे पर अलग रवैया अपना रही है', एनएससीएन-जीपीआरएन ने जारी किया बयान

'भारत सरकार नागा मुद्दे पर अलग रवैया अपना रही है', एनएससीएन-जीपीआरएन ने जारी किया बयान
'भारत सरकार नागा मुद्दे पर अलग रवैया अपना रही है', एनएससीएन-जीपीआरएन ने जारी किया बयान

कोहिमा, 14 सितंबर (आईएएनएस)। एनएससीएन/जीपीआरएन के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्रालय (एमआईपी) ने एक प्रेस बयान जारी कर भारत सरकार पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति और संवाद की वकालत करने तथा जमीनी स्तर पर नागा राजनीतिक मुद्दे के समाधान में कथित तौर पर विफल रहने का आरोप लगाया है।

संगठन ने कहा कि भारत सरकार वैश्विक मंचों पर शांति, कूटनीति और संवाद की बात करती है, लेकिन नागा राजनीतिक समझौतों को लागू करने की दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठा रही है।

बयान में हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा गया कि भारत ने नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026 के माध्यम से बहुपक्षीय सुधार, लोकतांत्रिक वैश्विक व्यवस्था, संप्रभु समानता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान जैसे सिद्धांतों का समर्थन किया। एनएससीएन/जीपीआरएन का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन मूल्यों की बात करने के बावजूद भारत सरकार नागा मुद्दे पर अलग रवैया अपना रही है।

संगठन ने दावा किया कि 3 अगस्त 2015 को भारत सरकार और नागा पक्ष के बीच हुए फ्रेमवर्क एग्रीमेंट में नागा लोगों के विशिष्ट इतिहास और राजनीतिक पहचान को स्वीकार किया गया था, लेकिन समझौते पर हस्ताक्षर के वर्षों बाद भी उसका पूर्ण क्रियान्वयन नहीं हो सका है। बयान में आरोप लगाया गया कि सरकार राजनीतिक समाधान के बजाय सुरक्षा-आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दे रही है।

मणिपुर की स्थिति का उल्लेख करते हुए एनएससीएन/जीपीआरएन ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में जातीय तनाव और संघर्ष को रोकने में सरकार नाकाम रही है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ सशस्त्र समूहों को अप्रत्यक्ष समर्थन देकर क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में भारत सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया बयान में शामिल नहीं की गई है।

संगठन ने कहा कि नागा पक्ष 1997 से शांति वार्ताओं में भाग लेता रहा है और उसने लंबे समय तक धैर्य बनाए रखा है। बयान में चेतावनी दी गई कि यदि राजनीतिक संवाद की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और दमनात्मक नीतियां जारी रहीं, तो शांति वार्ता की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। संगठन का कहना है कि स्थायी समाधान के लिए दोनों पक्षों के बीच ईमानदार और सार्थक संवाद आवश्यक है।

अपने बयान के अंत में एनएससीएन/जीपीआरएन ने सभी प्रकार के उपनिवेशवाद को समाप्त करने की मांग दोहराई और भारत सरकार से नागा राजनीतिक मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने का आह्वान किया।

--आईएएनएस

एएमटी/एबीएम

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