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'भारत में शांति नहीं' वाले विवाद पर संजय दत्त के बचाव में उतरे शेखर सुमन, बोले- 'जो कहा ही नहीं, उसकी सजा क्यों?'

'भारत में शांति नहीं' वाले विवाद पर संजय दत्त के बचाव में उतरे शेखर सुमन, बोले- 'जो कहा ही नहीं, उसकी सजा क्यों?'
'भारत में शांति नहीं' वाले विवाद पर संजय दत्त के बचाव में उतरे शेखर सुमन, बोले- 'जो कहा ही नहीं, उसकी सजा क्यों?'

मुंबई, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त के 'भारत में अब शांति महसूस नहीं होती' वाले बयान पर शुरू हुए विवाद के बीच अब शो के होस्ट शेखर सुमन उनके बचाव में सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि संजय दत्त ने जो कुछ कहा, वह देश और देश के लोगों के प्रति सम्मान के साथ कहा था और उनकी बात का मकसद किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं था।

दरअसल, संजय दत्त शेखर सुमन के टॉक शो 'शेखर टूनाइट' में गांधी जयंती के मौके पर गेस्ट बनकर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने खुद को प्रधानमंत्री मानकर खास मुन्ना भाई अंदाज में देश को संबोधित किया और देश की मौजूदा स्थिति पर भी अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि उन्हें अब देश में शांति महसूस नहीं होती। उनके इस बयान पर विवाद खड़ा हो गया। इस पर शेखर सुमन की ओर से प्रतिक्रिया आई है।

उन्होंने कहा, '''शेखर टूनाइट' एक हल्का-फुल्का सटायरिकल शो है। यह सरकार या किसी भी चीज या किसी के भी खिलाफ नहीं है। यह लोगों के हक में है और पूरी तरह बिना किसी भेदभाव के और डेमोक्रेटिक है।''

उन्होंने आगे संजय दत्त का बचाव करते हुए कहा, ''अभिनेता अपने देश और यहां के लोगों की बहुत इज्जत करते हैं। उन्होंने जो कहा, वह पूरी तरह बिना किसी नुकसान के और सकारात्मक तरीके से कहा गया था। मुझे लगता है कि उन्हें उस चीज के लिए सजा नहीं मिलनी चाहिए और न ही बदनाम किया जाना चाहिए, जो उन्होंने कभी नहीं कहा या जिसका उनका मतलब नहीं था।''

शेखर ने आगे कहा, ''मैं संजय दत्त को कई सालों से जानता हूं। वह एक अच्छे इंसान हैं। वह अपने देश से प्यार करते हैं और उसका बहुत सम्मान करते हैं।''

बता दें कि शो में बातचीत के दौरान संजय दत्त ने कहा था, ''इस देश के लोग बहुत प्यारे हैं। यहां शांति होनी चाहिए। मुझे अब हमारे देश में वो शांति महसूस नहीं होती। हम भारतीय बड़े दिल वाले और मेहमाननवाज होते हैं। हमने बहुत कुछ दिया है और हमें हमेशा ऐसा ही रहना चाहिए। मैं भगवान शिव से प्रार्थना करता हूं कि वो दिन जल्द वापस आएं।''

संजय दत्त के इस बयान का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसके बाद कुछ लोगों ने उनके बयान को देश के मौजूदा हालात और सरकार पर टिप्पणी के तौर पर देखना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर सवाल उठे कि अभिनेता आखिर किस दौर की शांति की बात कर रहे हैं और उनके बयान का इशारा किस तरफ है। विवाद बढ़ने पर संजय दत्त को अपने बयान पर सफाई देनी पड़ी।

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि किसी भी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना, उनका अपमान करना या उनका अनादर करना मेरा मकसद कभी नहीं रहा है। मेरी टिप्पणियां एक स्क्रिप्टेड बातचीत के संदर्भ में की गई थीं, जिसका मकसद मजाकिया माहौल बनाना था। इसके पीछे की भावना 'मुन्नाभाई' की 'गांधीगिरी' की उस सोच से प्रेरित थी, जिसका उद्देश्य प्रेम, एकजुटता और सद्भावना का संदेश देना था। दुर्भाग्यवश, मेरी बातों को उस मूल संदर्भ से अलग तरीके से समझा गया।"

--आईएएनएस

पीके/एबीएम

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