भारत में प्रताड़ित हिंदुओं को रहने का अधिकार, घुसपैठियों को करेंगे डिपोर्ट : निशीथ प्रमाणिक
कूचबिहार, 26 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 'देश धर्मशाला नहीं है' वाले बयान का पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि अवैध रुप से आने वाले लोगों को भारत में रहने का अधिकार नहीं है।
कूचबिहार में आईएएनएस से मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने कहा, "भारत ने हमेशा पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का सामना कर रहे अल्पसंख्यकों को आश्रय दिया है, चाहे वे हिंदू हों, सिख हों, जैन हों या कोई अन्य अल्पसंख्यक समुदाय। अलग-अलग देशों और समुदायों के कई लोग यहां आए हैं, यहीं बस गए हैं और इस देश के नागरिक बन गए हैं। उन सभी लोगों को इस देश में रहने का अधिकार है।"
उन्होंने कहा, "चाहे बांग्लादेश हो, पाकिस्तान हो, श्रीलंका हो, वहां पर अगर हिंदू धार्मिक रूप से प्रताड़ित होकर इस देश में आते हैं तो निश्चित रूप से उन लोगों को इस देश में रहने का अधिकार है। वहीं, अगर अगर मुस्लिम समुदाय के लोग घुसपैठ करके अवैध रूप से इस देश में प्रवेश करते हैं और यहां की शांति और अमन को खंडित करने का प्रयास करते हैं तो निश्चित रूप से हमारे देश का शासन चुप नहीं बैठेगा। उनको निश्चित रूप से डिटेन भी किया जाएगा और डिपोर्ट भी किया जाएगा क्योंकि उन लोगों के लिए दुनिया भर में बहुत सारे देश हैं जहां पर मुस्लिम रह सकते हैं।"
वहीं, हिजाब पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी द्वारा निंदा किए जाने पर मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने कहा, "शायद असदुद्दीन ओवैसी ने बयान देने से पहले ठीक से सोचा नहीं। अगर वह हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, तो मैं कहूंगा कि कई मुस्लिम देश ऐसे हैं जहां लंबे समय से स्कूलों और कॉलेजों में हिजाब पहनने पर रोक लगाने वाले नियम लागू हैं। जब दुनिया के सभी डेवलप्ड नेशन इसको फॉलो कर रहे हैं तो भारत में क्यों नहीं? ये असदुद्दीन ओवैसी जैसे लोग जो बार-बार सेक्युलरिज्म की आवाज उठाते हैं, तो धर्म की पर्ची लेकर स्कूल-कॉलेज में क्यों जाना है।"
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जब हम लोग महिला सशक्तीकरण की बात करते हैं, जब हम लोग महिलाओं की साक्षरता के बारे में बात करते हैं, जब हम लोग नारी की आजादी के बारे में बात करते हैं, तो वही लोग जाकर महिला को पर्दे के पीछे धकेलने का जो प्रयास करते हैं, यह दोहरापन कुछ और नहीं हो सकता।"
--आईएएनएस
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