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भारत को शक्तिशाली बनाना लक्ष्य, लेकिन किसी पर प्रभुत्व नहीं: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

भारत को शक्तिशाली बनाना लक्ष्य, लेकिन किसी पर प्रभुत्व नहीं: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन
भारत को शक्तिशाली बनाना लक्ष्य, लेकिन किसी पर प्रभुत्व नहीं: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन

नई दिल्‍ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (एनडीसी) के 66वें पाठ्यक्रम के प्रतिभागियों को 'भारत के मूल मूल्य, राष्ट्रीय हित और राष्ट्रीय उद्देश्य' विषय पर संबोधित किया।

उपराष्ट्रपति ने भारतीय सशस्त्र बलों, सिविल सेवाओं, पुलिस और अन्य सरकारी संगठनों के अधिकारियों के साथ-साथ मित्र देशों के 41 अधिकारियों सहित 122 प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए समकालीन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में रणनीतिक सोच, एकीकृत नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।

सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि देश के मूल मूल्य ही उसकी पहचान की नींव होते हैं। उन्होंने बताया कि भारत हमेशा "वसुधैव कुटुंबकम" यानी "पूरी दुनिया एक परिवार है" की भावना में विश्वास करता है। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान दूसरे देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराने, आपदा के समय मदद पहुंचाने और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत की सक्रिय भूमिका को इसका उदाहरण बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय हित संप्रभुता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, न्याय, स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता जैसे संवैधानिक मूल्यों से प्रेरित हैं। उन्होंने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना, इसके लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और संघीय स्वरूप को बनाए रखना, इसके रणनीतिक, राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाना, विकास और मानव विकास के लिए एक स्थिर और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना और अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता में योगदान देना जैसी पांच व्यापक प्राथमिकताओं पर बल दिया।

राष्ट्रीय सुरक्षा के बढ़ते परस्पर जुड़ाव का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने आतंकवाद, साइबर खतरों, महामारियों, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय अपराध जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अधिक अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा और साझा वैश्विक हितों को आगे बढ़ाना अक्सर परस्पर सहायक उद्देश्य होते हैं, जिनके लिए समन्वित कार्रवाई, सूचना साझाकरण और राष्ट्रों के बीच आपसी विश्वास की आवश्यकता होती है।

वर्ष 2047 तक विकसित भारत को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य बताते हुए उपराष्ट्रपति ने उपलब्ध संसाधनों, सुदृढ़ नीतिगत विकल्पों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ दीर्घकालिक दृष्टिकोण को संरेखित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा में भारत की भूमि, हवाई क्षेत्र, समुद्री हितों और साइबर क्षेत्र की रक्षा करना, साथ ही सतत विकास और समृद्धि के लिए परिस्थितियां बनाना शामिल है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत का लक्ष्य विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनना है, लेकिन दूसरों पर प्रभुत्व स्थापित करने या उन्हें अपनी शर्तें मनवाने के लिए नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी देश हम पर अनैतिक शर्तें न थोपे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राष्ट्र की संप्रभुता और आत्मसम्मान का सम्मान किया जाना चाहिए और देशों को एक-दूसरे की क्षेत्रीय सीमाओं का अतिक्रमण करने से बचना चाहिए।

सीपी राधाकृष्णन ने वैश्विक दक्षिण के साथ मजबूत जुड़ाव का आह्वान करते हुए पारस्परिक सम्मान, संप्रभु समानता और साझा विकास प्राथमिकताओं के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने देशों से चुनौतियों से परे देखने और प्रौद्योगिकी, व्यापार, संपर्क, शिक्षा, नवाचार और क्षमता निर्माण में सहयोग को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार वैश्विक दक्षिण के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है और इसे खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने भावी रणनीतिक नेताओं के रूप में उपस्थित प्रतिभागियों से संस्थागत और व्यावसायिक सीमाओं से परे एक एकीकृत और दूरदर्शी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने प्रतिभागियों से अपने राष्ट्रों को परिभाषित करने वाले मूल्यों को समझने, संरक्षित किए जाने वाले हितों की पहचान करने, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, उन्हें बुद्धिमानी से प्राथमिकता देने और राष्ट्रीय संकल्पों को मूर्त परिणामों में बदलने के लिए रणनीतियां विकसित करने का आह्वान किया।

--आईएएनएस

एएसएच/वीसी

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