भारत के सफल सार्वजनिक नीति मॉडल अपनाने की राह पर इंडोनेशिया, नॉलेज पार्टनरशिप को मिलेगी नई गति
नई दिल्ली, 5 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 6 से 8 जुलाई की इंडोनेशिया यात्रा बढ़ते सहयोग और 'नॉलेज पार्टनरशिप' को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। भारत और इंडोनेशिया की साझेदारी अब सिर्फ पारंपरिक रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीक, नीति और विकास के नए मॉडल साझा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
इंडोनेशिया आज भारत को सिर्फ एक रणनीतिक साझेदार के रूप में नहीं, बल्कि तकनीक, नीतियों और विकास से जुड़े सफल मॉडल्स के एक भरोसेमंद स्रोत के रूप में भी देख रहा है। खाद्य सुरक्षा, डिजिटल गवर्नेंस, स्वास्थ्य, कृषि और रक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत के सफल सार्वजनिक नीतिगत मॉडल अब इंडोनेशिया के अपने विकास सफर के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनते जा रहे हैं।
इंडोनेशिया के कई प्रतिनिधिमंडल भारत का दौरा कर चुके हैं, ताकि वे भारत की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण योजनाओं से सीख सकें। इनमें भारत की पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, चावल फोर्टिफिकेशन स्कीम, फर्टिलाइजर सब्सिडी सुधार और एग्रीस्टैक जैसी पहल शामिल हैं।
ये सभी मॉडल इंडोनेशिया के लिए उपयोगी संदर्भ बन रहे हैं, खासकर डिजिटल शासन और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के संदर्भ में।
इंडोनेशिया अब डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता का फायदा उठा रहा हैं। प्रस्तावित यूपीआई-क्यूआरआईएस लिंकिंग से दोनों देशों के यात्रियों और व्यापारियों के लिए बिना रुकावट के (सीमलेस) क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट संभव हो सकेगा। इस पहल से पर्यटन, व्यापार और डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही लेन-देन तेज, सस्ता और ज्यादा आसान हो जाएगा।
भारत से इंडोनेशिया में व्यापार या निवेश करने वाले बिजनेस और हर साल लगभग 1.7 मिलियन भारतीय पर्यटक जो बाली और अन्य इंडोनेशियाई जगहों पर जाते हैं। उनके लिए यह यूपीआई-क्यूआरआईएस सुविधा बहुत बड़ा बदलाव साबित हो सकती है।
भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर भी सहयोग का एक बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है। इंडोनेशिया का ओपन नेटवर्क (आईओएन) भारत के ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) मॉडल से प्रेरित है और इसका मकसद इंडोनेशिया के 6.5 करोड़ से ज्यादा छोटे, सूक्ष्म और मध्यम उद्यमों के लिए एक खुला और समावेशी डिजिटल बाजार बनाना है।
यह सिस्टम 2.0 प्रोटोकॉल पर आधारित है और उम्मीद है कि सात जुलाई को प्रबोवो शिखर सम्मेलन के दौरान इसका पहला लाइव ट्रांजेक्शन भी हो जाएगा।
भारत और इंडोनेशिया की डिजिटल साझेदारी अब सिर्फ सफल मॉडल साझा करने तक सीमित नहीं रही है, बल्कि अब यह अगले स्तर की डिजिटल बुनियादी संरचना बनाने की दिशा में बढ़ रही है। इंडोनेशिया की महत्वाकांक्षी 'डिजिटल नुसंतारा' पहल का लक्ष्य एक एकीकृत और आपस में जुड़ा हुआ राष्ट्रीय डिजिटल सिस्टम बनाना है और इस यात्रा में भारत की तकनीकी विशेषज्ञता एक अहम सहयोगी बन रही है।
आधार, यूपीआई, डिजीलॉकर, ई-केवाईसी और ओएनडीसी जैसे भारत के डिजिटल समाधान अब इंडोनेशिया के डिजिटल बदलाव में भी उपयोगी साबित हो रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अब संस्थागत स्तर पर गहरे सहयोग की ओर इशारा करता है, जहां भारतीय कंपनियां बड़े पैमाने पर सुरक्षित डिजिटल सिस्टम बनाने का अनुभव साझा कर रही हैं।
इंडोनेशिया का लक्ष्य अब सिर्फ तकनीक इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि 'आसियान' क्षेत्र में डिजिटल समाधान बनाने और उन्हें निर्यात करने वाला देश बनना भी है। भारत का पिछले एक दशक का अनुभव इंडोनेशिया के इस लक्ष्य को हासिल करने में काफी उपयोगी साबित हो रहा है।
दोनों देशों के बीच वित्तीय बाजारों में भी सहयोग बढ़ रहा है। भारत की विशेषज्ञता का इस्तेमाल अब एआई आधारित मार्केट निगरानी, डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म और टेक्नोलॉजी से जुड़े पूंजी बाजार सुधारों में करने पर चर्चा हो रही है। भारत ने अपने शेयर बाजारों को टेक्नोलॉजी की मदद से जिस तरह आधुनिक बनाया है, वह अब इंडोनेशिया के साथ सहयोग के नए रास्ते खोल रहा है।
इंडोनेशिया का महत्वाकांक्षी 'फ्री न्यूट्रिशियस मील्स' कार्यक्रम भारत की मिड-डे मील योजना से प्रेरित है। इसी तरह, इंडोनेशिया की 'रेड एंड व्हाइट विलेज कोऑपरेटिव्स' पहल में भारत के जन औषधि मॉडल से सहयोग की संभावना देखी जा रही है, ताकि सस्ती दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें और ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हो सकें। इसके लिए 'जन औषधि स्कीम' मॉडल एक अहम उदाहरण बन रहा है।
यह साझेदारी अब रक्षा क्षेत्र तक भी पहुंच रही है। इंडोनेशिया भारत के साथ रक्षा निर्माण, तकनीक के आदान-प्रदान, सैन्य प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा सहयोग पर काम कर रहा है। भारत का 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन का अनुभव इस क्षेत्र में लंबे समय तक सहयोग के नए अवसर बना रहा है। आत्मनिर्भर भारत इस सहयोग की एक अहम नींव बन रही है।
ये सारी पहल एक बड़े बदलाव की तरफ इशारा करती हैं कि भारत की विकास यात्रा अब सिर्फ उसके अपने नागरिकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह अब दोस्त देशों के लिए भी एक मॉडल बनती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के साथ यह बढ़ती हुई 'नॉलेज पार्टनरशिप' दोनों देशों के रिश्तों का एक मजबूत आधार बन रही है, जिससे इनोवेशन, आर्थिक विकास और लंबे समय की रणनीतिक साझेदारी के नए मौके बन रहे हैं।
--आईएएनएस
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