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'भारत की असली ताकत जन-संकल्प', मन की बात कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को 'मन की बात' के 130वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को संबोधित कर रहे हैं। यह 2026 में पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम का पहला एपिसोड है।
'भारत की असली ताकत जन-संकल्प', मन की बात कार्यक्रम में बोले पीएम मोदी

नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को 'मन की बात' के 130वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को संबोधित कर रहे हैं। यह 2026 में पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम का पहला एपिसोड है।

देशवासियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत के लोग बेहद इनोवेटिव हैं और समस्याओं का समाधान खुद ढूंढ लेते हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थानीय लोगों द्वारा की गई पर्यावरण संरक्षण की सफल पहलों का जिक्र कर जन-भागीदारी की ताकत पर जोर दिया।

पीएम मोदी ने तमसा नदी के पुनरुद्धार की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि अयोध्या से निकलकर गंगा में मिलने वाली तमसा नदी कभी स्थानीय लोगों के जीवन की धुरी थी, लेकिन प्रदूषण के कारण इसकी धारा रुक गई थी। लेकिन, आजमगढ़ के लोगों ने एकजुट होकर नदी की सफाई अभियान चलाया, किनारों पर पेड़ लगाए और नदी को नया जीवन दिया। इसी तरह, आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में लंबे समय से सूखे की समस्या थी। यहां 'अनंत निरु संकल्प प्रोजेक्ट' के तहत स्थानीय लोगों ने करीब 10 जलाशयों को साफ किया और पुनर्जीवित किया।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल जल संरक्षण हुआ, बल्कि ग्रीन कवर भी बढ़ा और पूरा इकोसिस्टम निखर उठा। प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि आजमगढ़ हो या अनंतपुर, ये देखकर खुशी होती है कि लोग एकजुट होकर संकल्प लेते हैं। यही हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।" उन्होंने जोर दिया कि ऐसी छोटी-छोटी पहलें बड़े बदलाव लाती हैं और पर्यावरण संरक्षण में जन-भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। यही हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि हमारी संस्कृति और त्योहार दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं। दुनिया भर में भारत के त्योहार बड़े उत्साह और उल्लास के साथ मनाए जाते हैं। देश के लोग जहां भी हैं, वे अपनी संस्कृति की मूल भावना को संरक्षित कर रहे हैं और उसे आगे बढ़ा रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि मलेशिया में 500 से ज्यादा तमिल स्कूल हैं। इन स्कूलों में तमिल भाषा की पढ़ाई के साथ ही अन्य विषयों को भी तमिल में पढ़ाया जाता है। इसके अलावा, यहां तेलुगु और पंजाबी सहित अन्य भारतीय भाषाओं पर भी बहुत फोकस रहता है।

--आईएएनएस

पीएसके

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