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भारत की 7.7 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ पर पूर्व नीति आयोग सदस्य बिंदु डालमिया बोलीं- अर्थव्यवस्था मजबूत

नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। इस उपलब्धि को लेकर पूर्व नीति आयोग सदस्य बिंदु डालमिया ने देश की आर्थिक स्थिति, रोजगार, प्रमुख विकास क्षेत्रों और भविष्य की चुनौतियों पर अपनी राय रखी।
भारत की 7.7 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ पर पूर्व नीति आयोग सदस्य बिंदु डालमिया बोलीं- अर्थव्यवस्था मजबूत

नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। इस उपलब्धि को लेकर पूर्व नीति आयोग सदस्य बिंदु डालमिया ने देश की आर्थिक स्थिति, रोजगार, प्रमुख विकास क्षेत्रों और भविष्य की चुनौतियों पर अपनी राय रखी।

उन्होंने आईएएनएस से कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन दुनिया में तेजी से बदलते हालातों के कारण आने वाले समय में सतर्क रहने की जरूरत होगी।

बिंदु डालमिया ने कहा कि फिलहाल भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियां हैं। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध और भू-राजनीतिक संघर्ष जारी हैं। कई देश क्षेत्रीय अधिकारों और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों को लेकर टकराव की स्थिति में हैं। ऐसे हालातों का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत की विकास दर, निर्यात और विनिर्माण क्षेत्र काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ती है तो सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि देश नए दौर के रोजगार सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी काफी काम बाकी है। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए सम्मानजनक और आधुनिक रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, हालांकि स्थिति अभी पूरी तरह संतोषजनक नहीं कही जा सकती। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के आंकड़ों में कमी आना एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। इसका अर्थ यह हो सकता है कि लोग आय के अन्य स्रोतों की ओर बढ़ रहे हैं। देश की प्रति व्यक्ति आय और प्रति व्यक्ति बचत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

जीडीपी वृद्धि के प्रमुख कारकों पर बात करते हुए बिंदु डालमिया ने कहा कि आर्थिक विकास किसी एक क्षेत्र से नहीं आता, बल्कि कृषि, विनिर्माण, सेवाओं और निवेश जैसे कई क्षेत्रों के संयुक्त योगदान से संभव होता है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े संभावित झटके चिंता का विषय बने हुए हैं। यदि मानसून सामान्य नहीं रहा तो खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित हो सकता है और महंगाई बढ़ सकती है। कोविड काल के दौरान भी केंद्र सरकार ने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक पूंजीगत व्यय किया था। सड़क, रेलवे, हवाई अड्डों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर निवेश ने रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश आज भी भारत की आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख आधार है।

बिंदु डालमिया ने कहा कि भारत को तेजी से विनियमन में सुधार करने की जरूरत है। 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के साथ-साथ 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ ट्रेडिंग' पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि भारतीय शेयर बाजार भी विकास का एक महत्वपूर्ण इंजन बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2025-26 की 7.7 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ पर उन्होंने कहा कि यह कोई स्थायी या तय आंकड़ा नहीं है। दुनिया इस समय बड़े आर्थिक और राजनीतिक बदलावों के दौर से गुजर रही है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की अवधि और तीव्रता भारत की विकास दर को प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया एआई-आधारित औद्योगिक क्रांति के नए दौर में प्रवेश कर रही है। ऐसे समय में भारत ने खुद को तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। यदि भारत कौशल विकास, तकनीक और रोजगार सृजन पर लगातार ध्यान देता रहा तो आने वाले वर्षों में भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाए रख सकता है।

--आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम

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