भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच दूसरी विदेश कार्यालय परामर्श बैठक, द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर जोर
नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच दूसरी विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) बैठक 12 जून 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई। दोनों देशों के बीच पहली एफओसी बैठक वर्ष 2022 में राजधानी पोर्ट मोरेस्बी में हुई थी।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (ओशिनिया) विश्वेश नेगी ने किया, जबकि पापुआ न्यू गिनी के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई इलियास वोहेन्गु (विदेश सचिव) ने की।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। इनमें विकास साझेदारी, राजनीतिक संपर्क, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक संबंध प्रमुख रहे। इसके अलावा दोनों देशों ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों तथा क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
दोनों पक्षों ने भारत-पापुआ न्यू गिनी संबंधों की सकारात्मक प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और विभिन्न क्षेत्रों में जारी सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई।
बैठक में यह भी तय किया गया कि विदेश कार्यालय परामर्श का अगला दौर पोर्ट मोरेस्बी में आपसी सहमति से तय की जाने वाली तिथि पर आयोजित किया जाएगा।
भारत और पापुआ न्यू गिनी के बीच राजनयिक संबंध वर्ष 1975 में पापुआ न्यू गिनी की स्वतंत्रता के बाद से ही लगातार सौहार्दपूर्ण, स्थिर और सहयोगात्मक रहे हैं। हाल के वर्षों में भारत ने अपनी ‘एक्ट ईस्ट नीति’ के तहत प्रशांत महासागर क्षेत्र के देशों के साथ संबंधों को विशेष प्राथमिकता दी है, और इस संदर्भ में पापुआ न्यू गिनी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में उभरा है।
दोनों देशों के बीच मजबूत राजनयिक संपर्क मौजूद हैं। पापुआ न्यू गिनी का नई दिल्ली में उच्चायोग है, जबकि भारत का उच्चायोग पोर्ट मोरेस्बी में कार्यरत है। यह संस्थागत ढांचा दोनों देशों के बीच नियमित संवाद और सहयोग को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
मई 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पापुआ न्यू गिनी की ऐतिहासिक यात्रा की, जो किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की इस द्वीपीय देश की पहली यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मरापे के साथ फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (एफआईपीआईसी) के तीसरे शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई गति और दिशा देने वाली मानी गई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, आर्थिक और व्यापारिक सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों देशों के संबंध लगातार विस्तार ले रहे हैं। पापुआ न्यू गिनी प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है, जिसमें सोना, तांबा और प्राकृतिक गैस जैसे महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। भारत वहां से तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात करता है, साथ ही भारतीय कंपनियां खनन और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसरों की तलाश में सक्रिय हैं।
इसके अलावा, भारत पापुआ न्यू गिनी के साथ क्षमता निर्माण और विकास सहयोग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, तकनीकी सहायता और विकास परियोजनाओं के माध्यम से भारत वहां के मानव संसाधन और संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने में योगदान दे रहा है।
कुल मिलाकर, भारत और पापुआ न्यू गिनी के संबंध राजनीतिक विश्वास, आर्थिक सहयोग और विकास साझेदारी पर आधारित हैं, जो भविष्य में और अधिक गहराई और विस्तार की ओर बढ़ते दिख रहे हैं।
--आईएएनएस
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