भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू, प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्जन ने जताई खुशी
नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्जन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि तय समय के अनुसार 20 अक्टूबर को भारत और न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) लागू हो गया। उन्होंने कहा कि अब से न्यूजीलैंड के कारोबारियों और कंपनियों को एक अरब से ज्यादा नए ग्राहकों तक पहुंचने का मौका मिलेगा।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्जन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पोस्ट पर इस समझौते की जानकारी साझा की।
पीएम क्रिस्टोफर ने पोस्ट में लिखा, ''आज से भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुआ हमारा ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) लागू हो गया है। मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर इस समझौते को आगे बढ़ाया है, जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद करेगा।''
पीएम क्रिस्टोफर ने कहा कि आज से न्यूजीलैंड के कारोबारियों और कंपनियों को एक अरब से ज्यादा नए ग्राहकों तक पहुंचने का मौका मिलेगा। अब उन्हें काफी कम शुल्क (टैरिफ) देना पड़ेगा।
पीएम ने कहा, ''न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए अपने उत्पाद बेचना आसान होगा। वे ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी दे सकेंगी, नई मशीनों में निवेश कर सकेंगी और अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगी। इससे और ज्यादा रोजगार पैदा होंगे तथा लोगों की आमदनी भी बढ़ेगी। यानी न्यूजीलैंड के स्थानीय समुदायों में अधिक पैसा आएगा और आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। इसी वजह से नेशनल पार्टी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार सक्रिय रही है और नए व्यापार समझौते करने पर काम कर रही है।''
भारत-न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) लागू करने की तारीख 20 अक्टूबर यानी विजयदशमी के दिन की तय की गई थी।
तारीख की घोषणा के समय केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि यह समझौता केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई नए क्षेत्रों में अपार संभावनाएं खुलेंगी। इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले अधिकांश उत्पादों पर अब शून्य (जीरो) शुल्क लगेगा, जिससे भारतीय निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इस समझौते के जरिए न्यूजीलैंड का बाजार भारत के लिए लगभग 140 सेवा क्षेत्रों में खुल गया है। इसके अलावा शिक्षा, खेल, संस्कृति, कृषि उत्पादकता और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा।
--आईएएनएस
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