भाजपा सांसदों के सज्जन कुमार के घर जाने पर भड़के एचएस फूलका, बोले- यह पार्टी के रुख के खिलाफ
नई दिल्ली, 29 अगस्त (आईएएनएस)। 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में लंबे समय तक पीड़ितों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ने वाले सुप्रीम कोर्ट के वकील और भाजपा नेता एचएस फूलका ने सज्जन कुमार के घर जाकर शोक व्यक्त करने वाले भाजपा सांसदों के कदम की आलोचना की। फूलका ने कहा कि भाजपा शुरू से ही 1984 के पीड़ितों के साथ खड़ी रही है और दोषियों को सजा दिलाने की मांग करती रही है। ऐसे में पार्टी के तीन सांसदों का सज्जन कुमार के घर जाना पार्टी के घोषित रुख के विपरीत था।
फूलका ने कहा कि 1984 के नरसंहार के बाद से भाजपा लगातार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी रही और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रयास करती रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और वकील रहे अरुण जेटली और रविशंकर प्रसाद भी इन मामलों में पीड़ितों की ओर से अदालत में पेश होते रहे हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब खुराना मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने फूलका को इन मामलों में सलाह देने के लिए अपना एडवाइजर बनाया था और उनके कार्यकाल में कई मामलों को दोबारा खोला गया।
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान नानावटी आयोग का गठन हुआ, जिसके बाद सज्जन कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामलों में आगे की कार्रवाई हुई। इन्हीं मामलों में आगे चलकर सज्जन कुमार को सजा मिली। उन्होंने दावा किया कि सज्जन कुमार की गिरफ्तारी और सजा के बाद भी भाजपा सरकार की ओर से उनकी जमानत और पैरोल का विरोध किया गया। तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर तत्कालीन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता हर सुनवाई में पेश हुए और जमानत और पैरोल का विरोध किया। फूलका ने आगे कहा कि सज्जन कुमार की ओर से जेल से बाहर आने के लिए कई प्रयास किए गए, लेकिन सरकारी पक्ष ने उनका विरोध किया।
जब उनसे कहा गया कि भाजपा सांसद व्यक्तिगत संबंधों के कारण श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे और सज्जन कुमार का अपने क्षेत्र में प्रभाव रहा है, तो फूलका ने इस तर्क को अस्वीकार किया। उन्होंने कहा कि उस क्षेत्र से भाजपा के कई नेता आते हैं और पार्टी में जाट समुदाय के भी अनेक नेता हैं, लेकिन उन्होंने कभी ऐसा कदम नहीं उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब भाजपा लगातार 1984 के दोषियों के खिलाफ कड़ी सजा, यहां तक कि फांसी की मांग करती रही है, तो ऐसे में इन सांसदों को वहां जाने की जरूरत क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत संबंध अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन जब किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले और दोषसिद्धि हो चुकी हो तथा पार्टी लंबे समय से पीड़ितों के साथ खड़ी रही हो, तब सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि सभा में शामिल होना राजनीतिक रूप से गलत संदेश देता है।
भाजपा नेतृत्व द्वारा तीनों सांसदों को फटकार लगाए जाने के फैसले का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष को जैसे ही सांसदों के वहां जाने की जानकारी मिली, उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें स्पष्ट किया कि उनका कदम पार्टी के आधिकारिक रुख के अनुरूप नहीं था।
--आईएएनएस
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