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'भगवंत मान नहीं, बेईमान', हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश पर रवनीत सिंह बिट्टू का पंजाब सरकार पर हमला

'भगवंत मान नहीं, बेईमान', हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश पर रवनीत सिंह बिट्टू का पंजाब सरकार पर हमला
'भगवंत मान नहीं, बेईमान', हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश पर रवनीत सिंह बिट्टू का पंजाब सरकार पर हमला

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने सोमवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से भ्रष्टाचार मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि वंत मान नहीं, बेईमान मान हैं।

पंजाब के मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने बयान में कहा, "भगवंत मान नहीं, बेईमान मान हैं। जो व्यक्ति पंजाब को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के वादे के साथ सत्ता में आया था, आज उसे अपने ही कार्यालय से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देना चाहिए। आम आदमी पार्टी के बड़े-बड़े 'कट्टर ईमानदारी' के दावों की आज असली परीक्षा हो रही है।"

बिट्टू ने कहा कि हाई कोर्ट के हस्तक्षेप ने पंजाब सरकार के उच्चतम स्तर पर जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े आरोपों को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि पंजाब की जनता को राजनीतिक नारों और बहानों के बजाय पारदर्शी जवाब मिलने चाहिए।

उन्होंने कहा कि हाल ही में चंडीगढ़ में मंत्रियों के आवासों को लेकर सामने आए विवादों और आरोपों ने भी सार्वजनिक स्तर पर सवाल खड़े किए हैं। सत्ता में बैठे लोगों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों की निष्पक्ष और गहन जांच जरूरी है।

बिट्टू ने विशेष रूप से अधिवक्ता निखिल सराफ की सराहना की, जिन्होंने कथित दबाव और धमकियों के बावजूद हाई कोर्ट में इस मामले को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता ने कथित तौर पर 200 से अधिक पन्नों की याचिका दायर कर मुख्यमंत्री कार्यालय के कामकाज से जुड़े गंभीर आरोपों को अदालत के सामने रखा।

याचिका में लगाए गए आरोपों के अनुसार, अधिकारियों की नियुक्तियों और तबादलों, जीएमएडीए और जीएलएडीए के बड़े विकास कार्यों, हथियार लाइसेंस, जमीन से जुड़े मामलों व खनन गतिविधियों के संबंध में कथित तौर पर अवैध भुगतान मांगे जाने के आरोप हैं। बिट्टू ने कहा कि इन सभी आरोपों की गहन जांच होनी चाहिए और उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।

बिट्टू ने कहा, "मुख्यमंत्री को राज्य के हित में अधिकारियों के तबादले करने और प्रशासनिक फैसले लेने का पूरा अधिकार है। लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल कथित भ्रष्टाचार या अनुचित प्रभाव का माध्यम नहीं बनना चाहिए। यदि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े आरोप सही साबित होते हैं, तो यह जनता के विश्वास के साथ गंभीर विश्वासघात होगा।"

उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पत्रों पर पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया पर भी सवाल उठाए। बिट्टू ने कहा कि हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया था और मामले की कार्यवाही से संबंधित जानकारी के अनुसार, पंजाब के डीजीपी से जवाब मांगने के लिए चार पत्र भेजे गए, लेकिन कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।

बिट्टू ने जांच सीबीआई को सौंपने के हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि जांच बिना किसी भय या पक्षपात के होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि किसी भी पद या राजनीतिक प्रभाव की परवाह किए बिना, गलत काम में शामिल पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जवाबदेही तय की जाए।

उन्होंने कहा, "पंजाब की जनता से 'कट्टर ईमानदारी' का वादा किया गया था, लेकिन आज उसी नारे की विश्वसनीयता सबसे बड़ी परीक्षा से गुजर रही है। जनता जानना चाहती है कि भ्रष्टाचार मुक्त सरकार के दावे और उसके वास्तविक कामकाज में कितनी समानता है। सीबीआई जांच के माध्यम से सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"

बिट्टू ने अपने बयान में यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी सत्ता में यह दावा करके आई थी कि वह व्यवस्था को भ्रष्टाचार से मुक्त करेगी। लेकिन आज उसी कार्यालय पर सवाल उठ रहे हैं, जहां से सरकार चलाई जाती है। नारों और खुद को ईमानदार बताने से जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि पंजाब को भगवंत मान से जवाब चाहिए, बहाने नहीं।

--आईएएनएस

डीसीएच/

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