भगवान कृष्ण पर मौलाना के बयान से नाराज हुए परमहंसाचार्य, राष्ट्रपति को पत्र लिख नमाज पर प्रतिबंध की मांग
अयोध्या, 17 जुलाई (आईएएनएस)। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। उन्होंने मौलाना जर्जिस अंसारी द्वारा भगवान कृष्ण को लेकर दिए गए बयान पर नाराजगी व्यक्त करते हुए नमाज पर प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है।
आईएएनएस से बातचीत में परमहंसाचार्य ने कहा कि मैंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र भेजा है। मौलाना जर्जिस अंसारी ने कहा है कि भगवान कृष्ण नमाजी थे और पांच वक्त नमाज पढ़ते थे। अगर इसी तरह का बयान किसी सनातनी ने अल्लाह के बारे में दिया होता, तो आज भारत ही नहीं, बल्कि इस्लामिक देशों में भी बवाल हो रहा होता।
उन्होंने कहा कि लगातार हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां करना, जिहाद के लिए हिंदुओं के अस्तित्व और गजवा-ए-हिंद का प्लान चल रहा है। भारत में विविध उपासनाएं हैं। ऐसे में मुसलमान कहते हैं कि अल्लाह के अलावा पूजा करने के लायक कोई नहीं है। इससे सनातन का अपमान होता है।
उन्होंने कहा कि भारत की मूल उपासना सनातन है। इस्लाम और ईसाइयत विदेश से आई हुई हैं। हम सबका सम्मान करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा अस्तित्व ही कोई खा ले। हमारी उपासना और संस्कृति को कोई खत्म कर दे। इसीलिए मैंने आज राष्ट्रपति को पत्र लिखा है।
परमहंसाचार्य ने कहा कि मैंने राष्ट्रपति से मांग की है कि भारत में नमाज पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जाए। नमाज पढ़ने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश दे दिया गया है। वहां शरिया कानून है, लेकिन हिंदुस्तान में वैदिक संस्कृति बची रहे, ऐसे में नमाज पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस्लाम ऐसी उपासना है, जो दूसरों को निगल जाती है। इस्लाम में जो कलमा पढ़ा जाता है, उसमें कहा जाता है कि अल्लाह के अलावा कोई और पूजा करने के लायक नहीं है। जहां इनकी जनसंख्या बढ़ जाती है, वहां पत्थर फेंकने से लेकर बम बांधकर फटने जैसे कुकृत्य होते हैं। ऐसे में संस्कृति के संरक्षण के लिए यह पत्र लिखा है।
--आईएएनएस
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