Samachar Nama
×

बंगाल चुनाव 2026: बरुईपुर पश्चिम में टीएमसी का किला मजबूत, भाजपा की दस्तक से बदलते संकेत

कोलकाता, 24 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित बरुईपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र जादवपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। सामान्य श्रेणी की यह सीट वर्ष 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद अस्तित्व में आई। परिसीमन के दौरान पुराने बरुईपुर विधानसभा क्षेत्र को दो भागों बरुईपुर पश्चिम और बरुईपुर पूर्व में विभाजित किया गया था। वर्तमान बरुईपुर पश्चिम क्षेत्र में बरुईपुर नगरपालिका के साथ-साथ बरुईपुर विकासखंड की 10 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
बंगाल चुनाव 2026: बरुईपुर पश्चिम में टीएमसी का किला मजबूत, भाजपा की दस्तक से बदलते संकेत

कोलकाता, 24 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित बरुईपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र जादवपुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। सामान्य श्रेणी की यह सीट वर्ष 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद अस्तित्व में आई। परिसीमन के दौरान पुराने बरुईपुर विधानसभा क्षेत्र को दो भागों बरुईपुर पश्चिम और बरुईपुर पूर्व में विभाजित किया गया था। वर्तमान बरुईपुर पश्चिम क्षेत्र में बरुईपुर नगरपालिका के साथ-साथ बरुईपुर विकासखंड की 10 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

बरुईपुर पश्चिम को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का गढ़ माना जाता है। राज्य विधानसभा के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता बिमन बनर्जी ने यहां से लगातार तीन बार जीत दर्ज की है। 2011 में उन्होंने सीपीआई(एम) उम्मीदवार को करीब 32 हजार वोटों से हराया। 2016 में जीत का अंतर बढ़कर 36 हजार से अधिक हो गया। 2021 में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को लगभग 62 हजार वोटों के बड़े अंतर से पराजित किया। इन लगातार जीतों ने इस सीट पर टीएमसी की पकड़ को और मजबूत किया है।

हालांकि टीएमसी की बढ़त बरकरार है, लेकिन भाजपा ने भी पिछले एक दशक में यहां उल्लेखनीय प्रगति की है। 2011 में जहां पार्टी को महज चार हजार से कुछ अधिक वोट मिले थे, वहीं 2016 में यह आंकड़ा 13 हजार से ऊपर पहुंच गया। 2021 के चुनाव में भाजपा को लगभग 59 हजार वोट मिले, जो पार्टी के विस्तार का संकेत देता है।

बरुईपुर पश्चिम की सामाजिक संरचना चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभाती है। यहां करीब एक-तिहाई मतदाता मुस्लिम समुदाय से आते हैं, जो आमतौर पर भाजपा के पक्ष में मतदान नहीं करते। 2021 के विधानसभा चुनाव में कुल पंजीकृत मतदाता 2.53 लाख से अधिक थे। इनमें लगभग 30 प्रतिशत मुस्लिम और लगभग उतनी ही संख्या अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के मतदाताओं की थी। क्षेत्र का करीब 52 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 48 प्रतिशत शहरी है। मतदान प्रतिशत भी यहां लगातार ऊंचा रहा है- 2021 में 83 प्रतिशत से अधिक, 2019 में 82 प्रतिशत और 2016 में करीब 86 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

2024 के लोकसभा चुनाव में भी बरुईपुर पश्चिम में टीएमसी ने अपनी बढ़त कायम रखी। पार्टी ने भाजपा पर 40 हजार से अधिक वोटों की बढ़त बनाई, जो 2019 की तुलना में अधिक थी।

बरुईपुर क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व भी है। यह कभी कोलकाता-पूर्व बंगाल रेलवे लाइन का एक प्रमुख स्टेशन रहा है। औपनिवेशिक दौर में यह इलाका नील की खेती के लिए प्रसिद्ध था। गंगा डेल्टा के समतल भूभाग में स्थित इस क्षेत्र में कई छोटी नदियां और जलधाराएं बहती हैं, जिनमें अदी गंगा भी शामिल है।

आर्थिक रूप से यहां कृषि प्रमुख आधार है- धान, सब्जियां और फूल मुख्य फसलें हैं। हालांकि तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के कारण कृषि भूमि पर दबाव बढ़ रहा है। बड़ी संख्या में लोग असंगठित क्षेत्र, छोटे व्यापार, निर्माण कार्य और सेवा क्षेत्र में जुड़े हैं। साथ ही, कई निवासी रोजाना बरुईपुर स्टेशन से सियालदह तक यात्रा कर कोलकाता में काम करने जाते हैं।

बरुईपुर पश्चिम में फिलहाल टीएमसी की स्थिति मजबूत है, लेकिन भाजपा की बढ़ती वोट हिस्सेदारी भविष्य के लिए संकेत देती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा को यहां वास्तविक चुनौती पेश करनी है, तो उसे अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बढ़ानी होगी, साथ ही शहरी मतदाताओं को अधिक मजबूती से साधना होगा।

दूसरी ओर, यदि वाम दल और कांग्रेस अपनी खोई जमीन वापस पाने में सफल होते हैं, तो इस सीट का चुनावी समीकरण और अधिक रोचक हो सकता है। फिलहाल बरुईपुर पश्चिम बंगाल की उन सीटों में शामिल है, जहां मुकाबला एकतरफा दिखता है, लेकिन बदलते रुझान भविष्य में नए संकेत दे सकते हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

Share this story

Tags