बेलगावी में गन्ना किसानों का आंदोलन तेज, डीसी दफ्तर के सामने खाना बनाकर जताया गुस्सा
बेलगावी, 3 नवंबर (आईएएनएस)। बेलगावी में गन्ना किसानों का विरोध-प्रदर्शन अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है। इस मामले को लेकर प्रभारी मंत्री सतीश जारकीहोली और एडिशनल डीसी के नेतृत्व में बैठक होने वाली है। यह बैठक बेलगावी के डीसी दफ्तर में होगी।
किसान नेता गणेश इलिगर के नेतृत्व में किसान बेलगावी डीसी दफ्तर के सामने इकट्ठा हो रहे हैं। किसानों ने डीसी दफ्तर के सामने खाना बनाकर अपना गुस्सा जाहिर किया है।
गन्ना किसान मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के उस बयान से नाराज हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि खजाने में पैसा नहीं है। किसान नेता गणेश इलिगर ने कहा कि राज्य सरकार गारंटी योजनाओं के लिए कर्ज लेती है, तो गन्ना किसानों के लिए भी छठी गारंटी घोषित करे।
बता दें कि कर्नाटक में गन्ना किसान 2026-27 के पेराई सीजन के लिए गन्ने की ज्यादा कीमत, चीनी के केंद्रीय न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी और राज्य स्तर पर बेहतर वित्तीय मदद की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, किसान प्रति टन गन्ने के लिए 5,500 रुपए की मांग कर रहे हैं, जिसमें केंद्रीय कीमत के ऊपर अतिरिक्त राज्य-परामर्श प्रोत्साहन या बोनस शामिल है।
किसान चाहते हैं कि केंद्र सरकार चीनी का एमएसपी 31 रुपए प्रति किलो से बढ़ाकर 60 रुपए प्रति किलो करे या 6,000 रुपए प्रति क्विंटल का न्यूनतम बिक्री मूल्य तय करे। उनका तर्क है कि चीनी का एमएसपी फरवरी 2019 से नहीं बदला है और मौजूदा चीनी कीमतों में मिलें किसानों को ज्यादा दर नहीं दे सकती हैं।
गन्ने की खेती को नकदी फसल कहा जाता है क्योंकि इसे मुख्य रूप से परिवार के भरण-पोषण या खाने के लिए नहीं, बल्कि बाजार में बेचकर सीधे मुनाफा और नकद आमदनी कमाने के उद्देश्य से उगाया जाता है। गन्ने का उत्पादन घरेलू उपयोग के लिए न होकर मिलों या बाजारों में व्यापार के लिए होता है, जिससे किसानों को सीधे अच्छी रकम प्राप्त होती है।
--आईएएनएस
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