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बाराबंकी में घाघरा का कहरः खेतों के बाद अब आशियानों पर कटान का खतरा, घर तोड़कर ईंटें बचाने को मजबूर ग्रामीण

बाराबंकी में घाघरा का कहरः खेतों के बाद अब आशियानों पर कटान का खतरा, घर तोड़कर ईंटें बचाने को मजबूर ग्रामीण
बाराबंकी में घाघरा का कहरः खेतों के बाद अब आशियानों पर कटान का खतरा, घर तोड़कर ईंटें बचाने को मजबूर ग्रामीण

बाराबंकी, 2 सितंबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के रामनगर तहसील के तराई इलाके में सरयू (घाघरा) नदी का जलस्तर बढ़ने-घटने के बीच अब कटान ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूरतगंज ब्लॉक क्षेत्र के हेतमापुर से केदारीपुर तक नदी लगातार किनारे की जमीन को काट रही है। खेतों के बाद अब कटान की जद में पक्के मकान आने लगे हैं। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण अपने हाथों से वर्षों की मेहनत से बनाए घरों को तोड़कर ईंट और जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने को मजबूर हैं।

नदी की तेज धारा के साथ कटान से बड़ी मात्रा में उपजाऊ जमीन और फसल नदी में समा चुकी है। ताजा स्थिति में केदारीपुर और हेतमापुर के आसपास कटान की रफ्तार ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। इन गांवों के पास सैकड़ों बीघा फसल कटान के चलते नदी में समा चुकी है।

केदारीपुर में ग्रामीण अपने घरों को बचाने के लिए सामान समेट रहे हैं। किसी ने घर की ईंटें निकालनी शुरू कर दीं तो कोई खेत में खड़ी फसल को समय से पहले काटकर सुरक्षित करने में जुटा है। फसल अभी पूरी तरह तैयार नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अगर नदी की धारा इसी तरह खेत काटती रही तो फसल भी हाथ नहीं आएगी। कम से कम उसे काटकर पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

केदारीपुर निवासी मोनू कुमार शुक्ला ने बताया कि उन्होंने धान की फसल में काफी पैसा लगाया था लेकिन कटान तेजी से खेत की ओर बढ़ रही है। परिवार में करीब 12-13 लोग हैं और अब फसल के साथ घर को भी बचाने की चिंता है। प्रशासन द्वारा कटान रोकने के पर्याप्त इंतजाम दिखाई नहीं दे रहे हैं।

वहीं, बुजुर्ग ग्रामीण का कहना है कि नदी की धारा लगातार जमीन काट रही है। कटान रोकने के लिए किए जा रहे उपाय नदी की तेज धारा के सामने टिक नहीं पा रहे हैं। खेतों के बाद अब मकानों की बारी आने से ग्रामीणों में भय का माहौल है।

मीरू शुक्ला ने कहा कि पक्का घर तोड़कर सामान निकाल रहे हैं, लेकिन अब जाएं तो जाएं कहां। प्रशासन की ओर से जो जमीन दी गई है, वह नाले के किनारे है, जहां परिवार को बसाना आसान नहीं है। ऐसे में बारिश के बीच परिवार के सामने रहने की चिंता खड़ी हो गई है।

अपर जिलाधिकारी निरंकार सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर घटने-बढ़ने के कारण कुछ स्थानों पर कटान की स्थिति बनती है। रामनगर और रामसनेहीघाट तहसील बाढ़ प्रभावित क्षेत्र हैं। वर्तमान में जलस्तर खतरे के निशान के आसपास है। हेतमापुर के आसपास आबादी के पास कटान को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

बता दें कि घाघरा नदी का जलस्तर पिछले दिनों खतरे के निशान के आसपास पहुंचा है। 1 सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक, एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई थी और बैराजों से छोड़े गए पानी का असर भी नदी के जलस्तर पर पड़ा। जलस्तर में उतार-चढ़ाव के साथ कई स्थानों पर कटान तेज होने की स्थिति सामने आई है।

--आईएएनएस

ओपी/एएस

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