बैंक फ्रॉड-मनी लॉन्ड्रिंग केस: ईडी ने आर-कॉम से जुड़ी 3034 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं
नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड की 3034.90 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से जब्त कर ली हैं। इस कार्रवाई के साथ ही रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) से जुड़े मामलों में कुल जब्ती की राशि 19,344 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।
यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 5 के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य संपत्तियों को नष्ट या स्थानांतरित होने से बचाना और बैंकों व आम जनता के हितों की रक्षा करना है।
इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही है। जांच में आरएएजी समूह से जुड़े उन मामलों की पड़ताल की जा रही है, जिनमें बैंकिंग प्रणाली और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के साथ-साथ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप शामिल हैं। ईडी की कार्रवाई कई सीबीआई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई, जो भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और भारतीय जीवन बीमा निगम जैसी संस्थाओं की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं। इन शिकायतों में कंपनी, अनिल डी. अंबानी और अन्य के खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
जांच में सामने आया है कि आर-कॉम और उसकी सहयोगी कंपनियों ने घरेलू और विदेशी ऋणदाताओं से भारी मात्रा में कर्ज लिया था, जिसमें से करीब 40,185 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं। ईडी की जांच के दौरान प्रमोटर समूह से जुड़ी कई महत्वपूर्ण संपत्तियों का पता चला, जिनमें मुंबई स्थित उषा किरण बिल्डिंग का एक फ्लैट, पुणे के खंडाला में एक फार्महाउस और अहमदाबाद के सानंद क्षेत्र में जमीन का एक टुकड़ा शामिल है। इसके अलावा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 7.71 करोड़ शेयर भी जब्त किए गए हैं, जो राइजी इंफिनिटी प्राइवेट लिमिटेड के पास थे। यह कंपनी राइजी ट्रस्ट के अंतर्गत आती है, जो अनिल अंबानी परिवार का निजी ट्रस्ट है।
जांच एजेंसी के अनुसार, राइजी ट्रस्ट का गठन संपत्तियों के संरक्षण और संसाधनों के सृजन के उद्देश्य से किया गया था। आरोप है कि इस ट्रस्ट के माध्यम से संपत्तियों को इस तरह संरक्षित किया गया, जिससे उन्हें अनिल अंबानी की व्यक्तिगत देनदारियों से अलग रखा जा सके। ये देनदारियां उन व्यक्तिगत गारंटियों से जुड़ी थीं, जो उन्होंने आर-कॉम को दिए गए कर्ज के बदले बैंकों को प्रदान की थीं। ईडी का कहना है कि इन संपत्तियों का उपयोग मुख्य रूप से परिवार के लाभ के लिए किया जा रहा था, जबकि जिन सार्वजनिक बैंकों के ऋण एनपीए में बदल गए, उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा था।
ईडी ने स्पष्ट किया है कि पीएमएलए की धारा-8 के तहत जब्त की गई संपत्तियों को अंततः उन वास्तविक दावेदारों को लौटाया जाएगा, जिन्हें इस धोखाधड़ी से नुकसान हुआ है, जिसमें संबंधित बैंक भी शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से संपत्तियों का मूल्य सुरक्षित रहता है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सार्वजनिक धन को बैंकों और अंततः आम जनता तक वापस पहुंचाया जा सकता है। ईडी ने दोहराया है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने और देश की वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
--आईएएनएस
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