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बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी: एक ही दिन में 9 बच्चों ने तोड़ा दम, मौत का आंकड़ा 700 के करीब

बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी: एक ही दिन में 9 बच्चों ने तोड़ा दम, मौत का आंकड़ा 700 के करीब
बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी: एक ही दिन में 9 बच्चों ने तोड़ा दम, मौत का आंकड़ा 700 के करीब

ढाका, 25 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी है। गुरुवार सुबह 8 बजे तक के 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों वाले नौ और बच्चों की मौत हो गई, जिसके बाद देश में खसरे से कन्फर्म और मिलते-जुलते लक्षणों से हुई मौत की कुल संख्या बढ़कर 700 के करीब यानी 698 हो गई है।

प्रमुख न्यूज एजेंसी यूएनबी ने बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के हवाले से बताया कि, हाल में हुई नौ मौत को संदिग्ध खसरा मौतों की श्रेणी में रखा गया है। इसके साथ ही खसरे की संख्या बढ़कर 605 हो गई है, जबकि प्रयोगशाला में पुष्टि किए गए खसरा जनित मौत का आंकड़ा 93 पर स्थिर बना हुआ है।

बीते 24 घंटों के दौरान खसरे के 893 नए संदिग्ध मामले दर्ज किए गए, जिससे देशभर में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 96,653 तक पहुंच गई है। वहीं, 52 नए मामलों की प्रयोगशाला में पुष्टि हुई, जिसके बाद पुष्ट संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 11,442 हो गई।

डीजीएचएस के आंकड़ों के मुताबिक, 10 अप्रैल से अब तक खसरे के संदिग्ध 80,497 मरीजों को देशभर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 76,788 मरीज स्वस्थ होकर अस्पतालों से छुट्टी पा चुके हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण को रोकने के लिए निगरानी, टीकाकरण और उपचार सेवाओं को और मजबूत किया जा रहा है। हालांकि लगातार बढ़ते मामलों और बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।

वहीं, बांग्लादेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन ने गुरुवार को संसद में कहा कि सरकार देशभर में खसरे के प्रसार को रोकने और बाल मृत्यु दर कम करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चला रही है।

राष्ट्रीय संसद (जातीय संसद) में सत्तारूढ़ दल की आरक्षित सीट की सांसद के प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य हर बच्चे को टीकाकरण के दायरे में लाना और बीमारी के खिलाफ मजबूत प्रतिरक्षा कवच तैयार करना है।

सखावत हुसैन ने कहा कि सरकार खसरे के प्रकोप से निपटने को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। हालांकि, टीके को लेकर हिचकिचाहट, अधूरा टीकाकरण, जनजागरूकता की कमी तथा कुछ मामलों में भौगोलिक और सामाजिक बाधाएं बीमारी के प्रसार में योगदान देती हैं।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकोप के लिए जिम्मेदारी तय करना संबंधित घटनाओं की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करता है।

मंत्री ने बताया कि खसरे से होने वाली मौतों और संक्रमण के मामलों में जवाबदेही का निर्धारण जांच रिपोर्ट और संबंधित आंकड़ों के आधार पर किया जाता है।

उन्होंने दोहराया कि सरकार का फोकस टीकाकरण कवरेज बढ़ाने, जागरूकता फैलाने और बच्चों को खसरे जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने पर है।

--आईएएनएस

केआर/

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