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बंगाल के सीएम ने पहली बार बीएसएफ जवानों संग मनाई दिवाली, सीमा सुरक्षा के लिए जमीन देने का किया ऐलान

बंगाल के सीएम ने पहली बार बीएसएफ जवानों संग मनाई दिवाली, सीमा सुरक्षा के लिए जमीन देने का किया ऐलान
बंगाल के सीएम ने पहली बार बीएसएफ जवानों संग मनाई दिवाली, सीमा सुरक्षा के लिए जमीन देने का किया ऐलान

कोलकाता, 8 नवंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित उत्तर 24 परगना जिले के हिंगलगंज में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों के साथ दिवाली मनाई। इसके साथ ही वह राज्य के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए, जिन्होंने बीएसएफ जवानों के बीच पहुंचकर दिवाली का त्योहार मनाया।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी दिवाली की सुबह हिंगलगंज स्थित बीएसएफ कैंप पहुंचे। यहां उन्होंने जवानों को दिवाली और काली पूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जवानों को मिठाइयां और दीये भेंट किए तथा उनके साथ समय बिताया।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने सीमा की सुरक्षा में तैनात जवानों के योगदान की सराहना की। उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 2027 से बीएसएफ, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और पश्चिम बंगाल पुलिस के उन कर्मियों को 'सीमा मित्र सम्मान' दिया जाएगा, जिन्होंने देश की सीमाओं की सुरक्षा में असाधारण योगदान दिया है। इस सम्मान के लिए चयन समिति पुरस्कार पाने वाले कर्मियों का चयन करेगी।

मुख्यमंत्री ने इस मौके पर पिछली सरकार के कार्यकाल में बीएसएफ और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के प्रति की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों और व्यवहार को लेकर भी माफी मांगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के तौर पर वह सुरक्षा बलों के जवानों से माफी मांगते हैं।

सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में बीएसएफ को बाड़ लगाने के लिए जिस जमीन की जरूरत थी, उसे लेकर अड़चनें थीं। अब राज्य सरकार ने वह जमीन सौंप दी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सीमा को सुरक्षित बनाने के लिए अगर भविष्य में और जमीन की जरूरत पड़ेगी, तो राज्य सरकार उसे भी उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा, "हम अगले साल से बीएसएफ, एसएसबी और पश्चिम बंगाल पुलिस के कर्मियों को 'सीमा मित्र' पुरस्कार देना शुरू करेंगे।" उन्होंने आगे कहा, "अगर सीमा को सुरक्षित करने के लिए और जमीन की जरूरत होगी, तो हम वह भी देंगे।"

--आईएएनएस

डीएससी

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