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बैलेट पेपर हो या ईवीएम, नतीजा एक जैसा; 28 एमएलसी सीटों पर कांग्रेस का खाता नहीं खुलाः प्रह्लाद जोशी

बैलेट पेपर हो या ईवीएम, नतीजा एक जैसा; 28 एमएलसी सीटों पर कांग्रेस का खाता नहीं खुलाः प्रह्लाद जोशी
बैलेट पेपर हो या ईवीएम, नतीजा एक जैसा; 28 एमएलसी सीटों पर कांग्रेस का खाता नहीं खुलाः प्रह्लाद जोशी

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर (आईएएनएस) केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर हो या ईवीएम, कांग्रेस के लिए नतीजा एक जैसा ही है। उन्होंने कहा कि देश के चार राज्यों में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी।

प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस लगातार ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाती है और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाती है। लेकिन जब चुनाव परिणाम उसके पक्ष में नहीं आते, तो वह व्यवस्था को दोष देने लगती है। उन्होंने खास तौर पर कर्नाटक का जिक्र किया, जहां कांग्रेस सत्ता में है। इसके बावजूद पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और उसका एक मौजूदा विधान परिषद सदस्य भी अपनी सीट नहीं बचा सका।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस अक्सर चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को लेकर सवाल उठाती है। लेकिन इस बार बैलेट पेपर से मतदान होने के बावजूद पार्टी को जीत नहीं मिली। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बैलेट पेपर हो या ईवीएम, परिणाम वही रहा। गौरतलब है कि कर्नाटक में विधान परिषद की चार सीटों पर हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) गठबंधन ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की।

इनमें बेंगलुरु शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की वह सीट भी शामिल है, जिस पर पहले कांग्रेस के पुट्टन्ना का कब्जा था। जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवार ए.पी. रंगनाथ ने पुट्टन्ना को 908 मतों से हराया है। प्रह्लाद जोशी ने कहा कि चुनाव में हार मिलने पर कांग्रेस व्यवस्था पर सवाल उठाती है, लेकिन बहाने बनाने से जनता के फैसले को छिपाया नहीं जा सकता।

उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों ने कांग्रेस के आरोपों पर सवाल खड़े किए हैं। गौरतलब है कि इन चुनावों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता शामिल होते हैं। इन नतीजों को चारों राज्यों के समूचे मतदाताओं की राय नहीं माना जा सकता। फिर भी, 28 सीटों पर कांग्रेस का खाता नहीं खुलना पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका है।

--आईएएनएस

जीसीबी/पीएम

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