बाल यौन शोषण सामग्री मामला: प्रियंक कानूनगो बोले-एमईआईटीवाई और एमआईबी से मांगा जवाब, दिल्ली पुलिस को 15 दिन का समय
नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएस)। बाल यौन शोषण सामग्री के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सख्त रुख पर एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि एनएचआरसी ने दो मंत्रालयों (एमईआईटीवाई और एमआईबी) से जवाब मांगा है। दिल्ली पुलिस को भी 15 दिन का समय दिया गया है।
प्रियंक कानूनगो ने कहा, "इस मामले में महीने तकरीबन डेढ़ महीने पहले संज्ञान लिया था और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा था। इस बात समझनी होगी कि अगर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री बनी है तो निश्चित तौर पर बच्चों का यौन शोषण हुआ है। यह एक अपराध है। दूसरा अपराध बच्चों का यौन शोषण और उनका वीडियो बनाना है। उस वीडियो को ऑनलाइन शेयर करना तीसरा अपराध है। इसी तरह उस सामग्री को बेचने के लिए विज्ञापन चलाना एक अलग अपराध है।"
उन्होंने कहा, "अलग-अलग कई तरीके के अपराध हुए हैं, उनकी पुलिस जांच होती है। इसलिए दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजकर जांच करने के निर्देश दिए थे। हमने दिल्ली पुलिस से कहा कि बच्चे देशभर के किस हिस्से के हैं, इसका पता लगाया जाए। दिल्ली को नोटिस इसलिए भेजा गया कि इसमें जो व्हिसलब्लोअर ऑर्गेनाइजेशन (बीबीसी) है, वो दिल्ली में है। इसलिए आसानी हो।"
उन्होंने आगे कहा, "दिल्ली पुलिस ने हमें यह जानकारी दी कि उसने मेटा व बीबीसी को नोटिस भेज दिया है और वे काम कर रहे हैं।"
इसी बीच, प्रियंक कानूनगो ने कहा, "शिकायतकर्ता ने दो सवाल उठाए हैं। उन्होंने हमें बताया है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने मेटा को नोटिस जारी किया है। इसलिए, यह कानूनी प्रावधानों के दायरे से बाहर की बात है, क्योंकि अगर कोई अपराध हुआ है तो जांच होगी, नोटिस नहीं भेजा जाएगा। अगर हमें कोई बलात्कारी को नोटिस भेजकर पूछें तो यह तरीका नहीं है। हमें इसकी जानकारी पुलिस को देनी चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा, "हमने एमईआईटीवाई ( इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) से पूछा है कि इस घटनाक्रम के बारे में पुलिस को बताने में उसके किसी अधिकारी से यह लापरवाही तो नहीं हुई है, क्योंकि हमें दिल्ली पुलिस ने ऐसी कोई सूचना नहीं दी कि एमईआईटीवाई से उसके पास कोई सूचना आई है।"
प्रियंक कानूनगो ने यह भी बताया कि मेटा को आईटी एक्ट की धारा 79 में एक 'सेफ हार्बर' मिला हुआ है। 'सेफ हार्बर' इस बात का है कि यह इंटरमीडियटरी (मध्यस्थ) प्लेटफॉर्म्स है। इसमें अगर आप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कोई चीज शेयर करते हैं तो इंटरमीडियटरी प्लेटफॉर्म्स कहता है कि 'मैं प्लेटफॉर्म हूं। यहां कोई भी आकर सामग्री शेयर करता है तो मैं इस सामग्री के लिए जिम्मेदारी नहीं हूं।' ऐसा तब तक होता है, जब यूजर अपने विवेक से सामग्री को अपलोड कर रहा है। यहां तक एक बदलाव यह आया है कि मेटा ने कुछ नए टूल्स लॉन्च किए हैं। वो एडिटिंग करके देते हैं।"
उन्होंने कहा, "मुझे शिकायतकर्ता ने जो बताया, वो हैरान करने वाला है। शिकायतकर्ता ने कुछ स्क्रीनशॉट्स भेजे हैं, जिनका अध्ययन करने पर पता चलता है कि मेटा यह भी बताता है कि किस प्रकार के प्रोटेस्ट का वीडियो डालने पर यूजर को पैसा मिलेगा। वो यह भी बताता है कि कितने बजे वीडियो अपलोड किया जाए। वो वीडियो का कैप्शन देता है और वीडियो को एडिट करने की सुविधा भी दे रहा है।"
प्रियंक कानूनगो ने कहा, "इस सब के कारण मेटा अपनी इंटरमीडियटरी (मध्यस्थ) प्लेटफॉर्म्स की भूमिका से बाहर आ जाता है। वह कंटेंट क्यूरेट करने वाला प्लेटफॉर्म बन जाता है। इस स्थिति में आईटी एक्ट की धारा 79 में एक 'सेफ हार्बर' खत्म हो जाता है।
उन्होंने कहा कि हमने दोनों मंत्रालयों से जवाब मांगा है। दिल्ली पुलिस ने हमसे 15 दिन का समय मांगा है। हमने उन्हें समय दे दिया है।
--आईएएनएस
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