बड़े भाई अनुपम खेर की छाया से निकलकर राजू खेर ने बनाई अलग पहचान, टीवी से फिल्मों तक का तय किया सफर
मुंबई, 10 सितंबर (आईएएनएस)। बॉलीवुड में जब भी खेर परिवार का नाम आता है तो सबसे पहले दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर का चेहरा सामने आता है। दशकों से फिल्मों में अपनी शानदार एक्टिंग से लोगों का दिल जीतने वाले अनुपम खेर की पहचान देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक है। इसी परिवार में एक और कलाकार हैं, जिन्होंने बड़े भाई की बड़ी पहचान के बीच रहते हुए भी एक्टिंग की दुनिया में अपना अलग सफर तय किया। ये हैं राजू खेर। फिल्मों में भले ही उन्हें अनुपम खेर जैसी स्टारडम नहीं मिली लेकिन टीवी, फिल्मों और निर्देशन के जरिए राजू खेर ने धीरे-धीरे अपनी एक अलग पहचान बनाई।
राजू खेर का जन्म 11 सितंबर 1957 को कश्मीर में हुआ था। वह अभिनेता अनुपम खेर के छोटे भाई हैं। राजू और अनुपम की उम्र में करीब दो साल का अंतर है। बचपन से ही दोनों भाइयों का रिश्ता काफी मजबूत रहा है। बाद में दोनों ने मनोरंजन की दुनिया में काम किया लेकिन दोनों के करियर का रास्ता अलग-अलग रहा। अनुपम खेर जहां बॉलीवुड के सबसे बड़े और व्यस्त अभिनेताओं में शामिल हो गए, वहीं राजू खेर ने धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई।
राजू खेर ने एक्टिंग की शुरुआत करने से पहले थिएटर में काम किया। थिएटर ने उन्हें एक्टिंग की बारीकियां सीखने का मौका दिया। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दौर में टीवी की दुनिया का रुख किया। 1990 के दशक में वह कई टीवी सीरियल्स में नजर आए। 'इम्तिहान', 'सैलाब' और 'जीने भी दो यारो' जैसे शो ने उन्हें दर्शकों के बीच पहचान दिलाई। उस दौर में अनुपम खेर पहले ही फिल्मों में बड़ा नाम बन चुके थे। ऐसे में राजू खेर को अक्सर उनके मशहूर भाई के नाम से पहचाना जाता था। हालांकि, राजू ने कभी इस तुलना को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।
एक इंटरव्यू में राजू खेर ने कहा था कि उन्हें तुलना करना पसंद नहीं है। उनका मानना था कि अगर इंसान अपना काम ईमानदारी से करे तो उसकी मेहनत लोगों को जरूर दिखाई देती है। उन्होंने कभी अनुपम खेर से मुकाबला करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने अनुपम के साथ अपना रिश्ता राम-लक्ष्मण के जैसा बताया। राजू ने कहा कि उन्होंने अनुपम खेर को काम करते हुए देखकर बहुत कुछ सीखा है।
टीवी पर काम करने के बाद राजू खेर ने फिल्मों की तरफ कदम बढ़ाया। उनकी पहचान बड़े पर्दे पर धीरे-धीरे बनी। वह 'गुलाम', 'जंगल', 'ओम जय जगदीश', 'दिल्ली बेली', 'कृष 3', 'शूटआउट एट वडाला' और 'मैं तेरा हीरो' जैसी फिल्मों में नजर आए। भले ही वह हर फिल्म में मुख्य भूमिका में नहीं थे लेकिन उन्होंने अपने किरदारों के जरिए स्क्रीन पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
राजू खेर सिर्फ अभिनेता ही नहीं रहे बल्कि उन्होंने निर्देशन में भी हाथ आजमाया। उन्होंने 1999 में टीवी सीरियल 'संस्कार' का निर्देशन किया। बाद में उन्होंने 'अभिलाषा' नामक सीरियल का भी निर्देशन किया।
उनके टीवी करियर की बात करें तो वह 'हमारी बेटियों का विवाह', 'धीरे-धीरे से', 'मोना होम डिलीवरी', 'बेइंतहां', 'डोली अरमानों की' और 'नवरंगी रे' जैसे कई शोज में नजर आए। अलग-अलग किरदारों में काम करते हुए उन्होंने छोटे पर्दे पर भी अपनी अलग पहचान बनाए रखी।
अनुपम खेर की बड़ी सफलता के बीच राजू खेर का सफर अलग जरूर रहा लेकिन दोनों भाइयों के रिश्ते में कभी कड़वाहट नहीं आई। हाल के वर्षों में अनुपम खेर ने भी अपने छोटे भाई के बारे में खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया कि राजू ने कभी उनकी सफलता से जलन नहीं की। वह उनकी सफलता को भी खुशी से देखते रहे।
--आईएएनएस
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