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बच्चों से जुड़े अश्लील सामग्री के मामले एनएचआरसी सख्त, कई राज्यों के डीजीपी समेत मंत्रालय और मेटा को नोटिस

बच्चों से जुड़े अश्लील सामग्री के मामले एनएचआरसी सख्त, कई राज्यों के डीजीपी समेत मंत्रालय और मेटा को नोटिस
बच्चों से जुड़े अश्लील सामग्री के मामले एनएचआरसी सख्त, कई राज्यों के डीजीपी समेत मंत्रालय और मेटा को नोटिस

नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों से जुड़े अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट उपलब्ध होने के आरोपों का संज्ञान लेते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, कई राज्यों की पुलिस और मेटा इंडिया को नोटिस जारी किया है। आयोग ने तीनों पक्षों से एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट-एटीआर) मांगी है।

आयोग ने यह कार्रवाई एक गैर-लाभकारी संस्था द्वारा भेजी गई शिकायत के आधार पर की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मेटा के प्लेटफॉर्म्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कुछ ऐसे लिंक उपलब्ध हैं जो अश्लील प्रकृति के हैं, बच्चों के लिए अनुपयुक्त हैं और उनमें कथित तौर पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (सीएसएएम) हो सकता है।

एनएचआरसी के सदस्य प्रियंक कानूनगो की पीठ ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह बच्चों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है और पॉक्सो अधिनियम, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता सहित अन्य कानूनों के तहत दंडनीय अपराध बन सकता है।

आयोग ने नोटिस जारी कर निम्न पक्षों से एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है, जिसमें पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और मेटा इंडिया के लॉ एनफोर्समेंट प्रमुख शामिल हैं।

एनएचआरसी ने ओडिशा, हरियाणा, नई दिल्ली, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, बिहार के डीजीपी को निर्देश दिया है कि शिकायत के साथ संलग्न यूआरएल और डिजिटल साक्ष्यों की तुरंत साइबर क्राइम यूनिट और विशेष किशोर पुलिस इकाई के माध्यम से जांच कराई जाए।

आयोग ने कहा कि यदि जांच में संज्ञेय अपराध के संकेत मिलते हैं तो एफआईआर दर्ज की जाए और कथित सामग्री के निर्माता, अपलोडर, प्रकाशक, प्रसारक या अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

साथ ही यदि किसी बच्चे की पहचान पीड़ित के रूप में होती है तो उसे तत्काल बचाव, चिकित्सा सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श, पुनर्वास और अन्य कानूनी सहायता प्रदान की जाए।

आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से पूछा है कि कथित आपत्तिजनक यूआरएल को हटाने, ब्लॉक करने या उनकी पहुंच प्रतिबंधित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

इसके अलावा मंत्रालय से यह भी पूछा गया है कि ऐसी सामग्री दोबारा अपलोड न हो, इसके लिए क्या व्यवस्था की गई है और ऑनलाइन बाल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कौन से दीर्घकालिक कदम प्रस्तावित हैं।

मेटा इंडिया को निर्देश दिया गया है कि कथित सामग्री हटाने या उसकी पहुंच रोकने के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी दे। साथ ही संबंधित खातों, मेटाडेटा, आईपी लॉग, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

आयोग ने मेटा से यह भी पूछा है कि यदि सामग्री में सीएसएएम पाया जाता है तो पॉक्सो कानून के तहत स्थानीय पुलिस या विशेष किशोर पुलिस इकाई को इसकी सूचना देने के संबंध में क्या कार्रवाई की गई।

आयोग ने कहा कि सभी संबंधित पक्ष अपनी कार्रवाई रिपोर्ट आयोग को एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराएं।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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