Samachar Nama
×

बच्चों और नई पीढ़ी से बड़ा कोई नहीं है, छात्रों की समस्याओं का समाधान हो : आनंद दुबे

बच्चों और नई पीढ़ी से बड़ा कोई नहीं है, छात्रों की समस्याओं का समाधान हो : आनंद दुबे
बच्चों और नई पीढ़ी से बड़ा कोई नहीं है, छात्रों की समस्याओं का समाधान हो : आनंद दुबे

मुंबई, 17 अगस्त (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने झारखंड में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर कहा कि राज्य का आंदोलन हो या जंतर-मंतर का, सरकार किसी भी दल की हो, बच्चों और नई पीढ़ी से बड़ा कोई नहीं है। छात्र पेपर लीक, नौकरियों में भ्रष्टाचार और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली से परेशान हैं। यह उनके माता-पिता का भी गुस्सा है, जो सरकार चुनने के लिए मतदान करते हैं।

आनंद दुबे ने कहा कि सरकार को आत्मचिंतन करना चाहिए कि बार-बार बच्चे नाराज क्यों हो रहे हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को राज्य के नेताओं से मिलकर इस मुद्दे का समाधान करना चाहिए, ताकि छात्रों की शिक्षा से जुड़ी परेशानियां दूर हो सकें।

गोपीनाथ मुंडे और एकनाथ शिंदे को लेकर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई के दावे पर आनंद दुबे ने कहा कि गोपीनाथ मुंडे अब हमारे बीच नहीं हैं और वह ओबीसी समाज के बड़े नेता रहे हैं। ऐसे दिवंगत नेता के बारे में टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। पृथ्वीराज चव्हाण और गोपीनाथ मुंडे के बीच क्या बातचीत हुई थी, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। वहीं, एकनाथ शिंदे को लेकर उन्होंने कहा कि उन्हें कई बार विधायक बनाने में बालासाहेब ठाकरे और उद्धव ठाकरे की भूमिका रही। अगर वह कांग्रेस में जाने की तैयारी कर रहे थे तो इसके बारे में हुसैन दलवई को ही बताना चाहिए। शिवसेना ने शिंदे को नेता, विधायक और मंत्री बनाया, इसके बावजूद अगर वह पार्टी छोड़कर गए तो इसके पीछे उनकी अपनी कोई इच्छा या महत्वाकांक्षा रही होगी।

प्रधानमंत्री मोदी से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मुलाकात पर आनंद दुबे ने कहा कि उन्हें भी इसकी जानकारी मिली है। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक मुलाकात हुई। यह भाजपा का अंदरूनी मामला है। वास्तविक स्थिति फडणवीस या प्रधानमंत्री के बयान के बाद ही स्पष्ट होगी। एक मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री से मिल सकता है, राज्य का बड़ा नेता देश के बड़े नेता को मिल सकता है। इस पर हम यही कह सकते हैं कि शायद भाजपा में कोई मंथन चल रहा है, या भाजपा में ये जो मंत्रिमंडल का फेरबदल है, इसको लेकर कोई मंथन या कोई चर्चा चल रही होगी।

'वंदे मातरम' विवाद पर आनंद दुबे ने कहा कि इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। 'वंदे मातरम' देश की भावना से जुड़ा गीत है और सभी को इसका सम्मान करना चाहिए। वहीं, सोनिया गांधी के खिलाफ केस दर्ज होने पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। भाजपा इस मुद्दे के जरिए यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि कांग्रेस कम और भाजपा ज्यादा देशभक्त है। पक्ष और विपक्ष दोनों देशभक्त हैं।

ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी की अनिवार्यता पर आनंद दुबे ने कहा कि भाषा सम्मान का विषय है। महाराष्ट्र और मुंबई में रहने वाला हर व्यक्ति मराठी भाषा और संस्कृति का सम्मान करता है। शिवसेना ने मराठी सिखाने के लिए पहले भी अभियान चलाया है। जो लोग अभी तक मराठी नहीं सीख पाए हैं, उन्हें थोड़ा और समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में अधिक से अधिक लोग मराठी बोलना, पढ़ना और लिखना सीखेंगे तथा महाराष्ट्र की संस्कृति को अपनाएंगे।

एनटीए द्वारा यूजीसी-नेट 2026 परीक्षा के तीन विषयों के पेपरों को दोबारा कराने की फैसले पर आनंद दुबे ने एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक होने और परीक्षाएं रद्द होने से छात्रों की मानसिक स्थिति पर असर पड़ता है। सरकार को एनटीए में सुधार करना चाहिए और ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, जिससे भविष्य में पेपर लीक की घटनाएं न हों।

आनंद दुबे ने 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर कहा कि भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को देशभक्त और राष्ट्रवादी होना चाहिए। उन्होंने अपनी पार्टी को भी 'दिमागी राष्ट्रवादी' और 'दिमागी सनातनी' बताया।

--आईएएनएस

पीएसके/एबीएम

Share this story