बाबूलाल मरांडी ने झारखंड ट्रेजरी घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की दोहराई मांग, सीएम को लिखा पत्र
रांची, 15 मई (आईएएनएस)। झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य के ट्रेजरी घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक बार फिर पत्र भेजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में एक महीने पहले पत्र लिखे जाने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि यदि समय रहते इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो झारखंड में भी बिहार के चारा घोटाले जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसमें अधिकारियों के साथ-साथ सरकार में बैठे जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
उन्होंने दावा किया कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि राज्यव्यापी संगठित आर्थिक अपराध का उदाहरण है। पत्र में कहा गया है कि अब तक हजारीबाग, बोकारो, पलामू, गढ़वा, रांची, गुमला, देवघर, जमशेदपुर और साहिबगंज समेत करीब 14 जिलों के कोषागारों से लगभग 130 करोड़ रुपए की अवैध निकासी की जानकारी सामने आ चुकी है।
मरांडी ने आरोप लगाया कि शुरुआत में यह मामला बोकारो और हजारीबाग तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ कई अन्य जिलों में भी गड़बड़ियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से नए मामलों का खुलासा हो रहा है, उससे घोटाले का दायरा और बड़ा होने की आशंका है।
पत्र में बोकारो के गिरफ्तार लेखपाल कौशल पांडे को पूरे मामले का मुख्य आरोपी बताने पर भी सवाल उठाया गया है। मरांडी ने कहा कि ई-कुबेर प्रणाली में छेड़छाड़ और करोड़ों रुपए की अवैध निकासी जैसा जटिल काम किसी एक व्यक्ति के बूते संभव नहीं लगता। उन्होंने बोकारो में तत्कालीन डीएसपी स्तर के अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
नेता प्रतिपक्ष ने हजारीबाग ट्रेजरी मामले का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस विभाग के कुछ कर्मियों ने मृतक पुलिसकर्मियों के आश्रितों के नाम पर खोले गए खातों का दुरुपयोग कर सरकारी राशि की अवैध निकासी की और उसे रिश्तेदारों एवं परिचितों के खातों में ट्रांसफर किया।
मरांडी ने पत्र में यह भी कहा कि विभिन्न जिलों में ट्रेजरी से होने वाली निकासी की निगरानी की जिम्मेदारी जिला स्तर के डीडीओ और पुलिस अधीक्षकों की होती है। ऐसे में पूरे मामले में डीएसपी और एसपी स्तर के अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच जरूरी है। उन्होंने झारखंड सरकार की एजेंसी जैप-आईटी की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है, ताकि तकनीकी स्तर पर हुई कथित हेराफेरी का खुलासा हो सके।
उन्होंने अपने पत्र में ऊर्जा विभाग, पथ निर्माण विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में पूर्व में सामने आए कथित अवैध निकासी मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में सरकारी धन की सुनियोजित लूट का यह सिलसिला चिंताजनक है।
--आईएएनएस
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