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बार-बार होने वाला सिरदर्द हो सकता है खतरे की घंटी, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

बार-बार होने वाला सिरदर्द हो सकता है खतरे की घंटी, भूलकर भी न करें नजरअंदाज
बार-बार होने वाला सिरदर्द हो सकता है खतरे की घंटी, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

नई दिल्ली, 3 जुलाई (आईएएनएस)। सिरदर्द को आमतौर पर लोग एक साधारण समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। थकान, नींद की कमी, काम का तनाव, पानी की कमी, या लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन देखने के बाद होने वाला सिरदर्द आम बात है और आराम करने से अक्सर ठीक भी हो जाता है, लेकिन मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, हर सिरदर्द सामान्य नहीं होता। जब यह दर्द बार-बार होने लगे या इसके साथ शरीर में कुछ असामान्य बदलाव दिखने लगें, तो इसे हल्के में लेना सही नहीं होता। कई बार यही बदलाव किसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्या, जैसे ब्रेन ट्यूमर का शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

ब्रेन ट्यूमर को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि इसका पहला और सबसे बड़ा लक्षण तेज और असहनीय सिरदर्द होता है, लेकिन मेडिकल रिसर्च बताती है कि शुरुआती चरण में यह बीमारी अक्सर बहुत साधारण संकेतों के साथ शुरू होती है, जिन्हें लोग सामान्य थकान या तनाव समझ लेते हैं। इसी वजह से कई मामलों में सही समय पर पहचान नहीं हो पाती। ब्रेन ट्यूमर के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि ट्यूमर दिमाग के किस हिस्से में है, उसका आकार कितना है और वह कितनी तेजी से बढ़ रहा है।

जब दिमाग में किसी जगह असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि शुरू होती है, तो वह आसपास के ऊतकों पर दबाव डालने लगती है। इसी दबाव की वजह से अलग-अलग तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर ट्यूमर सोचने-समझने या याददाश्त वाले हिस्से में है, तो व्यक्ति को चीजें भूलने की समस्या, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई या निर्णय लेने में परेशानी हो सकती है। कई लोग इसे बढ़ती उम्र या मानसिक तनाव मान लेते हैं, जबकि यह एक शुरुआती संकेत हो सकता है।

इसी तरह अगर ट्यूमर दिमाग के उस हिस्से को प्रभावित करता है जो देखने की क्षमता को नियंत्रित करता है, तो व्यक्ति को धुंधला दिखना, दोहरी छवि दिखाई देना या नजर कमजोर होने जैसी समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में मरीज को बोलने में कठिनाई होने लगती है या सही शब्द चुनने में परेशानी महसूस होती है। ये बदलाव धीरे-धीरे आते हैं, इसलिए लोग इन्हें गंभीरता से नहीं लेते।

ब्रेन ट्यूमर का असर शरीर के संतुलन और मांसपेशियों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में व्यक्ति को चलते समय लड़खड़ाहट महसूस हो सकती है, हाथ-पैरों में कमजोरी आ सकती है या रोजमर्रा के काम करने में दिक्कत आने लगती है। कुछ मामलों में अचानक चिड़चिड़ापन, व्यवहार में बदलाव या सामाजिक दूरी बढ़ना भी देखा जाता है, जिसे अक्सर मानसिक तनाव समझ लिया जाता है।

हालांकि हर सिरदर्द खतरनाक नहीं होता, लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है। अगर सिरदर्द लगातार बढ़ रहा हो, बार-बार वापस आ रहा हो, नींद से जगा रहा हो या पहले से अलग और ज्यादा तीव्र महसूस हो रहा हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। अगर इसके साथ उल्टी, संतुलन बिगड़ना, नजर में बदलाव, कमजोरी या मानसिक भ्रम जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।

--आईएएनएस

पीके/वीसी

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