बाढ़ प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराएं, दशहरा से पहले 7 हजार रुपए की सहायता सुनिश्चित हो: सीएम सम्राट चौधरी
बेतिया, 30 सितंबर (आईएएनएस)। बिहार में बाढ़ की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को पश्चिम चंपारण के विभिन्न बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को दशहरा से पहले सात हजार रुपये की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने सारण जिले के मकेर प्रखंड के हैजलपुर पंचायत क्षेत्र में टूटे तटबंध का भी हवाई सर्वेक्षण किया।
सीएम सम्राट चौधरी ने पश्चिम चंपारण के बगहा, बैरिया प्रखंड के बथना, योगापट्टी प्रखंड के मच्छरगांवा तथा नौतन प्रखंड के शिवराजपुर, बनकटवा और आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। पटना से पश्चिम चंपारण पहुंचने के दौरान उन्होंने विभिन्न नदियों के जलस्तर और बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति का भी जायजा लिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने बैरिया प्रखंड के बथना स्थित पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में संचालित बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, पेयजल, शौचालय, पशु राहत शिविर, पशु शेड और महिलाओं एवं पुरुषों के लिए की गई आवासन व्यवस्था की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने सामुदायिक रसोई में स्वयं बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन परोसा। उन्होंने राहत शिविर में संचालित अस्थायी आंगनबाड़ी बाल शिविर का भी निरीक्षण किया और बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई तथा उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। चिकित्सा शिविर में दवाओं और उपचार की व्यवस्था का भी जायजा लिया।
उन्होंने शिविर में रह रहे लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को उनके तत्काल समाधान का निर्देश दिया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने बथना स्थित जिला स्तरीय कंट्रोल रूम में बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने जिले के मानचित्र के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, तटबंधों, राहत एवं चिकित्सा शिविरों तथा राहत-बचाव कार्यों की जानकारी दी। अधिकारियों ने प्रभावित आबादी, राहत सामग्री के वितरण और एनडीआरएफ तथा एसडीआरएफ की तैनाती से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया।
जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि नेपाल की ओर से इस बार अब तक सबसे अधिक पानी आया है। बगहा, रेवा घाट, लालगंज और गोपालगंज में उच्चतम जलस्तर दर्ज किया गया है। गंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से ऊपर है, हालांकि पानी धीरे-धीरे घट रहा है। डुमरिया पुल के समीप जलस्तर स्थिर है और पानी का दबाव भी कम हो रहा है। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल की तराई से पानी आने के कारण बाढ़ की विकट स्थिति उत्पन्न हुई है। कोसी और महानंदा नदी का सर्वे कराया जा रहा है, ताकि बाढ़ की समस्या का समग्र अध्ययन कर स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जा सके।
उन्होंने कहा कि अगले दो-तीन दिनों में पानी निकलने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पर्याप्त संख्या में सामुदायिक रसोई संचालित करने, जरूरत के अनुसार स्लुइस गेट खोलकर पानी की निकासी सुनिश्चित करने, नदियों के जलस्तर और तटबंधों की लगातार निगरानी करने तथा पर्याप्त संख्या में नावों की व्यवस्था रखने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रभावित लोगों तक सूखा राशन और अन्य राहत सामग्री पहुंचाने तथा पशुओं के लिए चारा और आश्रय की समुचित व्यवस्था करने को कहा। उन्होंने दशहरा से पहले बाढ़ पीड़ितों को 7 हजार रुपए की सहायता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को एसओपी के अनुसार सभी आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई और क्षतिग्रस्त संरचनाओं को दुरुस्त किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि लोग जब तक अपने घरों को वापस नहीं लौट जाते और स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, तब तक जरूरत के अनुसार सामुदायिक रसोई संचालित रखी जाए। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की तैनाती बनाए रखते हुए राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी रखने का भी निर्देश दिया।
--आईएएनएस
एमएनपी/डीकेपी

