पेयजल और स्वच्छता विभाग ने जिला कलेक्टरों के पेयजल संवाद का 10वां सम्मेलन आयोजित किया
नई दिल्ली, 14 जुलाई (आईएएनएस)। जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला कलेक्टरों के पेयजल संवाद के 10वें संस्करण का आयोजन किया। डीडीडब्ल्यूएस के सचिव अशोक केके मीणा ने संवाद की अध्यक्षता की। राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) के अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन और डीडीडब्ल्यूएस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें उपस्थित थे।
इसमें वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर/उपायुक्त और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के मिशन निदेशकों ने एक साथ आकर सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से सतत ग्रामीण पेयजल सेवा वितरण को सुदृढ़ करने के लिए जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के कार्यान्वयन में गति लाने पर विचार-विमर्श किया।
डीडीडब्ल्यूएस के सचिव अशोक केके मीणा ने उद्घाटन भाषण में कहा कि जल जीवन मिशन एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां ध्यान अवसंरचना के निर्माण से हटकर सामुदायिक-नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था (जन भागीदारी ) के माध्यम से सुनिश्चित और सतत ग्रामीण पाइपलाइन जल सेवा वितरण पर केंद्रित हो गया है।
अशोक केके मीणा ने सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्यों और जिलों से हर घर जल (एचजीजे) ग्राम पंचायतों (जीपी) के प्रमाणीकरण में गति लाने तथा ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों में स्थानीय भागीदारी को बढ़ावा देने और उसे सुदृढ़ करने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में जल अर्पण को वार्षिक सामुदायिक नेतृत्व वाले कार्यक्रम के रूप में संस्थागत बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने जल सेवा वितरण का उल्लेख करते हुए बताया कि जल सेवा आंकलन के अंतर्गत देशभर में 1.17 लाख से अधिक गतिविधियां पहले ही संपन्न हो चुकी हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मिशन के अंतर्गत निर्मित ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों और संपत्तियों का संचालन तथा रखरखाव (ओएंडएम) अब ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) की ओर से किया जाना चाहिए।
सचिव ने जल प्रशासन में डिजिटल प्रौद्योगिकियों की बढ़ती भूमिका पर बोलते हुए राज्य और जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पीएम गति शक्ति पोर्टल से जुड़ी हुई सुजलम भारत डिजिटल रजिस्ट्री के माध्यम से स्रोत से नल तक ग्रामीण जल आपूर्ति की सभी संपत्तियों की डिजिटल मैपिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि योजना, निगरानी, निवारक रखरखाव और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जल आपूर्ति संबंधी सभी संपत्तियों को जियो-टैग किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जेजेएम 2.0 के उद्देश्यों को व्यापक परिणामों में बदलने में जिला प्रशासनों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने बताया कि सतत सेवा वितरण, स्रोत की स्थिरता, सामुदायिक भागीदारी और प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी आगे चलकर मिशन के मुख्य स्तंभ होंगे। उन्होंने जिला कलेक्टरों से आग्रह किया कि वे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करें, कार्यान्वयन की नियमित समीक्षा करें और नवाचार को बढ़ावा दें तथा साथ ही ग्रामीण पेयजल प्रणालियों की दीर्घकालिक कार्यक्षमता सुनिश्चित करने के लिए एचजीजे की संपत्तियों का उचित मानचित्रण करें।
पेयजल संवाद में ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता सेवाओं की स्थिरता को सुदृढ़ करने में जल, स्वच्छता और स्वास्थ्य (डब्ल्यूएएसएच) के लिए 16वें वित्त आयोग के अनुदान की महत्वपूर्ण भूमिका को विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से उजागर किया गया। इसमें चयनित पांच जिलों किन्नौर (हिमाचल प्रदेश), हावेरी (कर्नाटक), दुमका (झारखंड), दक्षिण गोवा (गोवा) और उनाकोटी (त्रिपुरा) की प्रगति और सर्वोत्तम तौर-तरीकों के बारे में संबंधित जिला समाहर्ताओं/जिला मजिस्ट्रेटों की ओर से प्रस्तुति दी गई ताकि अन्य जिलों को पेयजल जेजेएम 2.0 के अंतर्गत कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने में सहायता और उनसे सीख मिल सके।
किन्नौर, हिमाचल प्रदेश के उपायुक्त डॉ. अमित कुमार शर्मा ने दुर्गम पहाड़ी भूभाग, बिखरी हुई बस्तियों और मौसम की चरम चुनौतियों के बावजूद किन्नौर के सभी 210 गांवों में 100 प्रतिशत हर घर जल कवरेज की उपलब्धि को प्रदर्शित किया। जिले में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल स्रोतों में वृद्धि करने, अवसंरचना के आधुनिकीकरण, तालाबों के जीर्णोद्धार, हिम-जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पारंपरिक जल निकायों के संरक्षण जैसे अभिनव उपायों का उल्लेख किया गया। सुजलम भारत डिजिटल रजिस्ट्री को अपनाने, जीआईएस-आधारित निगरानी, नियमित जल एवं स्वच्छता सर्वेक्षण (डीडब्ल्यूएम एस एम) की समीक्षा, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) को मजबूत करने और जल महोत्सव, जल अर्पण तथा महिलाओं की ओर से संचालित जल गुणवत्ता परीक्षण जैसी सामुदायिक पहलों ने जेजेएम 2.0 के अंतर्गत सतत सेवा वितरण को और मजबूत किया है।
कर्नाटक से हावेरी के उपायुक्त डॉ. विजयमहंतेश बी. दानम्मनावर ने प्रौद्योगिकी-आधारित शासन और समुदाय-नेतृत्व वाले संचालन एवं रखरखाव के माध्यम से सतत पेयजल सेवाओं को बढ़ावा देने में हावेरी की प्रगति के संबंध में प्रस्तुति दी। जिले में 95.36 प्रतिशत चालू घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) कवरेज हासिल कर लिया गया है और डिजाइन-निर्माण-संचालन-स्थानांतरण (डीबीओटी) मॉडल के अंतर्गत बहुत से गांवों के लिए बड़ी योजनाओं को लागू किया जा रहा है। वहां किए गए प्रमुख नवाचारों में सभी ग्राम पंचायतों में संचालन एवं रखरखाव की नीतियों को सार्वभौमिक रूप से अपनाना, जल आपूर्ति संपत्तियों की जियो-टैगिंग, सुजल गांव-आधारित संपत्ति प्रबंधन, पारदर्शी जल गुणवत्ता निगरानी के लिए जीवा जल मोबाइल एप्लिकेशन और छह गांवों को 24×7 जल आपूर्ति वाले गांवों के रूप में घोषित करना शामिल है, जिससे सेवा दक्षता में सुधार, जल की खपत में कमी और पंपिंग में लगने वाले समय में कमी आई है।
झारखंड से दुमका के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने ग्रामीण पेयजल अवसंरचना को बहाल करने और उसे बनाए रखने के लिए दुमका में अपनाई गई सफल समन्वय-आधारित रणनीति का उल्लेख किया। एकीकृत नियंत्रण कक्ष की स्थापना, ग्राम स्तर के रखरखाव कर्मियों का प्रशिक्षण, स्थानीय स्तर पर विकसित पुर्जों की आपूर्ति श्रृंखला और सुदृढ़ शिकायत निवारण तंत्र ने कार्यक्षमता और उत्तरदायित्व में उल्लेखनीय वृद्धि की है। जिले में जन भागीदारी, जल अर्पण दिवस, जल सहिया, उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह और जल गुणवत्ता निगरानी के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी ने जल आपूर्ति प्रणालियों के स्वामित्व और स्थिरता को और मजबूत किया है।
वहीं, दक्षिण गोवा, गोवा के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट ईगन क्लैटस ने डिजिटल प्रौद्योगिकियों और सतत जल संसाधन प्रबंधन के माध्यम से स्मार्ट जल उपयोगिता विकसित करने के दक्षिण गोवा के दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया। जिले में जल जीवन मिशन की सभी 118 परियोजनाओं को पूरा करके चालू कर दिया गया है, जिससे सभी ग्रामीण घरों को नल के पानी से जोड़ना सुनिश्चित हो गया है जबकि राज्य में पेयजल की लगभग 96 प्रतिशत मांग सतही जल आधारित क्षेत्रीय जल आपूर्ति प्रणालियों के माध्यम से पूरी की जा रही है। जिले में जीआईएस-आधारित नेटवर्क मैपिंग, आईओटी-सक्षम निगरानी, एससीएडीए सिस्टम, स्मार्ट मीटरिंग पहल, नियमित डीडब्ल्यूएएसएम समीक्षा, ग्राम-स्तरीय जल गुणवत्ता निगरानी और सुव्यवस्थित संचालन एवं रखरखाव योजना को अपनाने से विश्वसनीय, कुशल और सतत पेयजल सेवा वितरण को मजबूती मिल रही है।
त्रिपुरा से उनाकोटी के जिला मजिस्ट्रेट एवं कलेक्टर मेघा जैन ने ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने में जिले की प्रगति पर प्रकाश डाला। जिले में 89.16 प्रतिशत चालू घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) कवरेज से 47,800 से अधिक परिवारों को लाभ मिल रहा है। जिले में नियमित जल आपूर्ति प्रबंधन (डीडब्ल्यूएसएम) संबंधी बैठकों, तृतीय-पक्ष के निरीक्षणों, डिजिटल शिकायत निवारण मंचों और सामुदायिक सहभागिता तंत्रों के माध्यम से सुदृढ़ निगरानी का प्रदर्शन किया गया है। भूजल पुनर्भरण, स्रोत स्थिरता, एमजीएनआरईजीएस, वित्त आयोग अनुदान और एसबीएम (जी) के साथ समन्वय, तथा नवीन पुनर्भरण उपायों पर बल दिया गया है। वहीं, कलिगिरी सतही जल परियोजना के सफल कार्यान्वयन ने प्रदर्शित किया है कि कैसे समुदायिक-नेतृत्व वाली योजना ने दूरस्थ सीमावर्ती गांवों में मौसमी और टैंकर-आधारित आपूर्ति को स्थायी पाइपयुक्त पेयजल से बदलकर जल उपलब्धता में परिवर्तन ला दिया जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
एनजेजेएम के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक कमल किशोर सोआन ने जिलों की ओर से अपनाए गए नवोन्मेषी दृष्टिकोणों की सराहना की और इस बात पर बल दिया कि जेजेएम 2.0 की सफलता सामुदायिक नेतृत्व वाली शासन व्यवस्था को बढ़ावा देने में जिला कलेक्टरों के सक्रिय नेतृत्व पर निर्भर करती है। पेयजल संवाद ने जेजेएम के अंतर्गत हासिल की गई उपलब्धियों, मौजूदा चुनौतियों और सर्वोत्तम तौर-तरीकों को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया जिससे हर घर जल के अंतर्गत प्रगति को गति देने के लिए अपनाए गए विविध दृष्टिकोणों को रेखांकित किया गया।
--आईएएनएस
एएसएच/डीकेपी

