ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की डेडलाइन, संजय निरुपम ने फैसले को सराहा
मुंबई, 27 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने की समयसीमा को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के एक साल का समय देने के फैसले का शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने स्वागत किया। उन्होंने इसे ऑटो-टैक्सी चालकों के हित में बेहतर फैसला बताते हुए कहा कि मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए और भाषा को सख्ती के बजाय प्रेम और सम्मान के साथ बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
संजय निरुपम ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की घोषणा का वह स्वागत करते हैं। अभी करीब 10 से 15 प्रतिशत ऑटो-टैक्सी चालक ऐसे हैं, जिन्होंने मराठी भाषा नहीं सीखी है। ऐसे लोगों को अब एक वर्ष का समय दिया गया है, ताकि वे आसानी से भाषा सीख सकें। कुछ दिन पहले उनकी परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से भी मुलाकात हुई थी। उस दौरान उन्होंने 12 अगस्त के जीआर में दी गई एक महीने की समयसीमा को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका आरोप है कि इस आदेश का इस्तेमाल करते हुए कुछ आरटीओ अधिकारियों ने ऑटो चालकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी थी। कई चालकों को नोटिस दिए गए और लाइसेंस, बैज तथा परमिट जब्त किए जाने जैसी कार्रवाई की गई। इस वजह से ऑटो चालकों में डर का माहौल पैदा हुआ है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की नई घोषणा को कानूनी और प्रशासनिक रूप से लागू करने के लिए 12 अगस्त का जीआर वापस लेकर नया सरकारी आदेश जारी किया जाना चाहिए। करीब ढाई से तीन हजार ऑटो चालकों को नोटिस दिए जाने की जानकारी है और नया जीआर जारी होने के बाद इन नोटिसों को भी वापस लेना होगा। एक वर्ष के भीतर जो चालक मराठी सीख लेते हैं, यह अच्छी बात होगी। अगर किसी को इसके बाद भी कठिनाई रहती है तो उसे अतिरिक्त समय देने पर भी विचार किया जा सकता है। भाषा सीखने के लिए बहुत कठोर डेडलाइन जरूरी नहीं है।
संजय निरुपम ने कहा कि शिवसेना की शुरुआत से यह भूमिका रही है कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा, संस्कृति और मराठी अस्मिता का सम्मान करना चाहिए। यह नीति शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे के समय से चली आ रही है। उन्होंने एकनाथ शिंदे के बयान का भी हवाला देते हुए कहा कि मराठी को सख्ती की भाषा नहीं, बल्कि भक्ति की भाषा के रूप में बढ़ावा दिया जाना चाहिए। महाराष्ट्र में रहने वाले दूसरे राज्यों के लोग भी मराठी का सम्मान करते हैं और इसे सीखने का प्रयास करते हैं।
निरुपम ने कहा कि परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने ऑटो-टैक्सी चालकों के संबंध में मोटर व्हीकल एक्ट में मौजूद प्रावधानों को लागू करने की बात कही थी। इस पहल का उद्देश्य भाषा के प्रति सम्मान सुनिश्चित करना था और इसका किसी चुनाव से संबंध नहीं था। हालांकि, उन्होंने विपक्ष पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। निरुपम ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के नेताओं द्वारा मुंबई में रहने वाले उत्तर भारतीय ऑटो और टैक्सी चालकों के मुद्दे को उठाने पर सवाल किया।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनाव को देखते हुए मुंबई में रहने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को भड़काने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। मुंबई में रहने वाले इन लोगों की समस्याओं को शिवसेना गंभीरता से समझती है और उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाती रही है। मराठी सीखने और महाराष्ट्र की भाषा-संस्कृति का सम्मान करने की अपेक्षा अपनी जगह है, लेकिन इसके लिए चालकों को पर्याप्त समय और सहयोग भी मिलना चाहिए।
--आईएएनएस
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