अतीत की अमानत, भविष्य की विरासत... जनिए अभिलेखों का महत्व
नई दिल्ली, 8 जून (आईएएनएस)। आपकी डायरी, दादा-दादी के खत, जमीन के कागजात, बैंक पासबुक या स्कूल की मार्कशीट सिर्फ कागज के टुकड़े नहीं हैं। आज जो दस्तावेज हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा हैं, वही आने वाले समय में किसी परिवार, समाज या राष्ट्र की स्मृतियों को संजोने का माध्यम बन सकते हैं। यही कारण है कि अभिलेखों और अभिलेखागारों का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। इसलिए हर वर्ष 9 जून को अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस मनाया जाता है।
इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि अभिलेख केवल रिकॉर्ड नहीं होते, बल्कि वे हमारी पहचान, संस्कृति, प्रशासन और इतिहास के महत्वपूर्ण साक्ष्य होते हैं। आज के डिजिटल युग में जब सूचनाएं तेजी से बदल रही हैं, तब पुराने दस्तावेजों का संरक्षण और भी जरूरी हो गया है।
दरअसल, मानव सभ्यता के विकास के साथ अभिलेखों की भूमिका भी बढ़ती गई। प्राचीन शिलालेखों से लेकर आधुनिक डिजिटल फाइलों तक, हर दौर ने अपने समय की कहानी अभिलेखों में दर्ज की है। किसी भी देश का इतिहास, उसके सामाजिक बदलाव, राजनीतिक निर्णय और सांस्कृतिक विरासत इन्हीं अभिलेखों के जरिए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अभिलेखों के महत्व को बढ़ावा देने का कार्य इंटरनेशनल काउंसिल ऑन आर्काइव्स (आईसीए) करता है। वर्ष 2004 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में अभिलेखों के महत्व को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र से एक विशेष दिवस घोषित करने की मांग की गई थी। इसके बाद 2007 में आईसीए की वार्षिक बैठक में निर्णय लिया गया कि 9 जून को अंतर्राष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस के रूप में मनाया जाएगा। यह तिथि इसलिए चुनी गई क्योंकि 9 जून 1948 को यूनेस्को के संरक्षण में आईसीए की स्थापना हुई थी।
अभिलेख केवल अतीत को सुरक्षित रखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे लोकतंत्र और सुशासन की भी मजबूत नींव हैं। सरकारी निर्णयों का रिकॉर्ड, न्यायिक दस्तावेज, प्रशासनिक फाइलें और ऐतिहासिक प्रमाण पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं। यदि अभिलेख सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो इतिहास की अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां हमेशा के लिए खो सकती हैं।
भारत में भी अभिलेखों के संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। सदियों पुराने दस्तावेजों को डिजिटाइज करने का अभियान चलाया जा रहा है। राजाओं की रियासतों, ब्रिटिश काल की संपत्तियों और ऐतिहासिक भवनों से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज अब डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किए जा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि शोधकर्ताओं और आम लोगों को एक क्लिक पर महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही, बार-बार फाइलें खोलने से दस्तावेजों को होने वाले नुकसान से भी बचाया जा सकेगा।
इसी तरह बिहार अभिलेख भवन भी इतिहास का एक अनमोल खजाना है। यहां मुगल काल से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन और स्वतंत्र भारत तक के हजारों महत्वपूर्ण दस्तावेज संरक्षित हैं। जमींदारी प्रथा से जुड़े रिकॉर्ड, टोडरमल की डायरी और महात्मा गांधी के बिहार आगमन से संबंधित दुर्लभ दस्तावेज यहां मौजूद हैं। ये अभिलेख न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के इतिहास को समझने में मदद करते हैं।
--आईएएनएस
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