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होली पर खगोलीय संयोग: धुलंडी के दिन लगेगा साल का पहला खंडग्रास चंद्रग्रहण, धार्मिक दृष्टि से रहेगा खास

होली पर खगोलीय संयोग: धुलंडी के दिन लगेगा साल का पहला खंडग्रास चंद्रग्रहण, धार्मिक दृष्टि से रहेगा खास

इस बार रंगों का महापर्व होली और धुलंडी एक अद्भुत खगोलीय संयोग के बीच मनाई जाएगी। जहां एक ओर लोग रंग-गुलाल के साथ उत्सव में डूबे नजर आएंगे, वहीं दूसरी ओर आकाश में साल का पहला ‘खंडग्रास चंद्रग्रहण’ भी दिखाई देगा। 3 मार्च को पड़ रही धुलंडी के दिन यह विशेष खगोलीय घटना घटित होगी, जिसे लेकर धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व भी काफी बढ़ गया है।

खगोलविदों के अनुसार, खंडग्रास चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा के एक हिस्से को ढक लेती है। इस दौरान चंद्रमा का कुछ भाग धुंधला या काला दिखाई देता है। हालांकि यह पूर्ण चंद्रग्रहण नहीं होगा, लेकिन इसका दृश्य प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। खास बात यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव और सूतक काल भी मान्य रहेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण से पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसमें पूजा-पाठ, शुभ कार्य और भोजन बनाने जैसे कार्यों से परहेज किया जाता है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि चंद्रग्रहण का सूतक ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले प्रारंभ होता है। ऐसे में धुलंडी के दिन लोगों को ग्रहण के समय और सूतक को ध्यान में रखते हुए धार्मिक नियमों का पालन करना पड़ सकता है।

होली और ग्रहण का यह दुर्लभ संयोग वर्षों बाद बन रहा है। आमतौर पर त्योहारों के दौरान ग्रहण कम ही पड़ते हैं, इसलिए इस बार यह घटना लोगों के लिए उत्सुकता का विषय बनी हुई है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और मंत्र जाप की तैयारियां भी की जा रही हैं। कई श्रद्धालु ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान-दान और पूजा का विशेष महत्व मानते हैं।

हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है, लेकिन भारतीय संस्कृति में इसका धार्मिक और सामाजिक महत्व गहरा है। यही कारण है कि लोग इसे लेकर सतर्कता और आस्था दोनों का पालन करते हैं।

धुलंडी पर जहां एक ओर लोग रंगों की मस्ती में सराबोर रहेंगे, वहीं आसमान में घटने वाली यह खगोलीय घटना दिन को और भी खास बना देगी। रंगों के उत्सव और ग्रहण के संयोग ने इस साल की होली को यादगार बना दिया है।

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