₹4,000 करोड़ की संपत्ति, पर जेब में आए सिर्फ 84 रुपये! BJP विधायक ने 1 दिन मांगी भीख, बताया कैसा रहा अनुभव
महाराष्ट्र के सबसे अमीर विधायकों में शामिल बीजेपी विधायक पराग शाह का एक अलग ही अनुभव सामने आया है। करीब 4 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति रखने वाले पराग शाह ने एक दिन के लिए भिखारी बनकर मुंबई की सड़कों पर घूमने का फैसला किया। इस दौरान उन्होंने करीब 4 घंटे तक लोगों से भीख मांगी और कुल 84 रुपये उनके हाथ में आए।
पराग शाह ने खुद इस अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें ऐसा करने की प्रेरणा उनके जैन गुरु श्री नम्रमुनि महाराज से मिली थी। उनका कहना है कि इस अनुभव ने उन्हें जिंदगी और इंसानियत को देखने का एक बिल्कुल अलग नजरिया दिया।
रेलवे स्टेशन पर बैठकर मांगी भीख
पराग शाह के मुताबिक, वह सामान्य कपड़ों में घर से निकले और एक रेलवे स्टेशन पर जाकर बैठ गए। इस दौरान पुलिसकर्मियों को उन पर शक भी हुआ और वे उन्हें ध्यान से देखने लगे।
उन्होंने बताया कि इस दौरान एक महिला ने उन्हें किचन में इस्तेमाल होने वाला सामान दिया। पराग शाह ने वह सामान एक पुलिस अधिकारी को दे दिया। बाद में शाम को वह उसी सामान को पराग शाह के रूप में वापस लेने पहुंचे।
किसी ने झिड़का, किसी ने नजरअंदाज किया
भिखारी के रूप में सड़कों पर घूमने के दौरान पराग शाह ने लोगों के अलग-अलग व्यवहार को करीब से महसूस किया। उनके मुताबिक, कुछ लोगों ने उन्हें डांटकर वहां से जाने को कहा, कुछ ने पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया, जबकि कुछ लोगों ने उनकी पहचान या स्थिति जाने बिना ही मदद के लिए हाथ बढ़ाया।
पराग शाह ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें यह समझाया कि पद, पैसा और प्रतिष्ठा से मिलने वाला सम्मान हमेशा स्थायी नहीं होता। उनके मुताबिक, इंसानियत के नाम पर मिलने वाला सम्मान ही ऐसी दौलत है जो लंबे समय तक साथ रहती है।
'भिखारी बनकर समझ आया कि मैं सिर्फ एक इंसान हूं'
पराग शाह ने अपने अनुभव को याद करते हुए कहा कि कुछ घंटों के लिए भिखारी बनकर सड़क पर बैठने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि वह भी बाकी लोगों की तरह एक साधारण इंसान हैं।
उनके मुताबिक, उस वक्त न कोई पद उनके साथ था, न पैसा और न ही प्रतिष्ठा। उन्होंने कहा कि इस अनुभव के दौरान उन्हें लगा कि इंसान की असली पहचान उसकी जाति, धर्म, पैसा या पद नहीं, बल्कि उसका इंसान होना है।
मुंबई के लोगों की तारीफ की
पराग शाह ने इस दौरान मुंबई के लोगों की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने बिना यह जाने कि मदद मांगने वाला व्यक्ति कौन है, उसकी मदद करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की मदद बिना किसी स्वार्थ और उम्मीद के करना ही सच्ची मानवता है। उनके मुताबिक, इस अनुभव ने उन्हें महसूस कराया कि मुंबई सिर्फ सपनों का शहर नहीं बल्कि मानवता का शहर भी है।
'ये अनुभव पूरी जिंदगी याद रहेगा'
पराग शाह का कहना है कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर इंसान की पहचान उसके पैसे, पद और प्रतिष्ठा से करने लगते हैं। लेकिन एक दिन भिखारी बनकर उन्होंने महसूस किया कि जब ये चीजें सामने नहीं होतीं तो इंसान और इंसान के बीच का रिश्ता कितना अलग हो जाता है।
उनके मुताबिक, मुंबई की सड़कों पर बिताए वे चार घंटे और लोगों से मिले 84 रुपये उनकी जिंदगी के उन अनुभवों में शामिल हैं, जिन्हें वह लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे।

