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असम चुनाव में पहली बार उतरे जेएमएम को नहीं मिली कोई सीट, वोटों के आंकड़ों से हेमंत सोरेन उत्साहित

रांची, 4 मई (आईएएनएस)। असम में पहली बार चुनाव लड़ने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) को भले ही कोई सीट हासिल नहीं हुई हो, लेकिन पार्टी अपने प्रदर्शन से उत्साहित नजर आ रही है। बिना किसी बड़े गठबंधन के मैदान में उतरी पार्टी ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ा और अब तक की मतगणना में करीब 1.8 प्रतिशत मत हासिल किए हैं।
असम चुनाव में पहली बार उतरे जेएमएम को नहीं मिली कोई सीट, वोटों के आंकड़ों से हेमंत सोरेन उत्साहित

रांची, 4 मई (आईएएनएस)। असम में पहली बार चुनाव लड़ने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) को भले ही कोई सीट हासिल नहीं हुई हो, लेकिन पार्टी अपने प्रदर्शन से उत्साहित नजर आ रही है। बिना किसी बड़े गठबंधन के मैदान में उतरी पार्टी ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ा और अब तक की मतगणना में करीब 1.8 प्रतिशत मत हासिल किए हैं।

पार्टी के अध्यक्ष और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि हमारे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि दो सीटों पर हमारे प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे, जबकि 7 सीटों पर हमारे प्रत्याशियों ने 15 हजार से अधिक वोट प्राप्त कर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।

सीएम हेमंत सोरेन ने असम की जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस प्रदर्शन को एक नई ऊर्जा का स्रोत बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि बहुत ही सीमित समय और संसाधनों के बावजूद जो कुछ हासिल किया गया, वह जनता के सहयोग के बिना संभव नहीं था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि असम में चुनाव लड़ने का फैसला केवल राजनीतिक विस्तार मात्र नहीं था, बल्कि वहां के आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक समाज के हक, सम्मान और पहचान की लड़ाई को मजबूत आवाज देने की दिशा में एक ठोस कदम था। मुख्यमंत्री ने असम में आदिवासियों और चाय बागान मजदूरों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि वहां आदिवासियों को अब तक एसटी का दर्जा न मिलना, मजदूरों को उचित मजदूरी का अभाव और जमीन के अधिकारों से वंचित रहना जैसे मुद्दों ने ही इस संघर्ष की नींव रखी थी।

उन्होंने कहा कि बिना किसी बड़े गठबंधन के पहली ही कोशिश में दो सीटों पर दूसरे नंबर पर आना और सात सीटों पर सम्मानजनक वोट पाना यह संकेत देता है कि जेएमएम ने असम की जनता के बीच अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी है। सीएम हेमंत सोरेन ने अपने वक्तव्य में जोर देते हुए कहा कि यह केवल एक चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई है।

उन्होंने विश्वास जताया कि यह तो केवल एक शुरुआत है और आने वाले समय में संगठन असम में और भी मजबूती के साथ उभरेगा। उनके अनुसार, यह परिणाम स्पष्ट करते हैं कि आदिवासी समाज के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूती से उठाने की आवश्यकता है और जेएमएम का यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

--आईएएनएस

एसएनसी/डीकेपी

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