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एशियन गेम्स: देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर चंबा लौटीं सीमा कुमारी, भव्य स्वागत पर जताई खुशी

एशियन गेम्स: देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर चंबा लौटीं सीमा कुमारी, भव्य स्वागत पर जताई खुशी
एशियन गेम्स: देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीतकर चंबा लौटीं सीमा कुमारी, भव्य स्वागत पर जताई खुशी

चंबा, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। धाविका सीमा कुमारी ने आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 10,000 मीटर दौड़ स्पर्धा में देश के लिए ब्रॉन्ज मेडल जीता। सीमा ने इस दौड़ को 32 मिनट 50.05 सेकंड में पूरा किया। जब सीमा चंबा अपने घर वापस लौटीं, तो उनका जोरदार स्वागत हुआ।

सीमा ने पत्रकारों से कहा, "जैसे कि आप दूसरे राज्यों में देखते होंगे, जब भी वहां के खिलाड़ी एयरपोर्ट से बाहर निकलते हैं तो उनका पूरा गांव वहां पर इकट्ठा होता है और बैंड-बाजे के साथ उन्हें अपने घर गांव तक वापिस लेकर जाता है। मैं जब चंबा में आई तो उसके बाद मेरा भी बहुत मान-सम्मान हुआ। आज तक मेरा ऐसे कभी स्वागत नहीं हुआ था। ये मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। मैं सभी को धन्यवाद देना चाहती हूं। खासतौर पर उन्हें, जिन्होंने मेरे लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया। राइजिंग स्टार स्कूल के प्रधानाचार्य संजीव सूरी हम लोगों के साथ साल 2017 से जुड़े हुए हैं।"

"जब मैंने साल 2017 में यूथ एशिया में ब्रॉन्ज मेडल जीता था, तो उस समय कपिल भैया, मनोज कुमार मनु और संजीव सूरी सर ने सबसे पहले मुझे सम्मानित किया। आज मुझे चंबा और हिमाचल में काफी लोग जानते हैं। इस मेडल के बाद मुझे पूरे भारतवासियों ने बहुत ज्यादा प्यार दिया है। मैं सभी का बहुत आभार व्यक्त करती हूं, लेकिन ब ये लगता है कि मुझे मेरे देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लाना है,क्योंकि ये ब्रॉन्ज है, मैं इससे नहीं खुश हूं इतना ज्यादा कि मैंने ब्रॉन्ज जीता है।"

उन्होंने कहा, "मैं इस मेडल का क्रेडिट बहुत सारे लोगों को देना चाहती हूं। इस मेडल में बहुत सारे लोगों का हाथ रहा है। हमारी एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, साई, टॉप्स इस टाइम पे बहुत ही अच्छा हमारे लिए कर रहे हैं। हमें यूएस में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है। हम वहां ओलंपिक चैंपियन और वर्ल्ड चैंपियन एथलीट्स के साथ ट्रेनिंग करते हैं, जिससे हमें उनके पैतरों का भी पता चलता है।"

"मैं लंबे समय से मां से भी नहीं मिली हूं। मेरी मां का भी इस मेडल के पीछे बहुत बड़ा हाथ है। मैं उनका कभी अहसान नहीं चुका पाऊंगी। आज अगर वो मेरी वजह से गर्व महसूस कर रही हैं तो वो मेरे लिए खुशी की बात है। अगर मेरे पिता होते, तो उनको भी बहुत गर्व होता, लेकिन मेरे पूरे चंबावासियों को मुझ पर गर्व है, मेरे लिए इससे बड़ी खुशी की बात कुछ भी नहीं हो सकती है।"

--आईएएनएस

आरएसआरएसजी

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