चुनाव आयोग पर उठे सवालों पर नकवी बोले-'असहमति लोकतंत्र में ही संभव, तानाशाही में नहीं'
नई दिल्ली, 24 सितंबर (आईएएनएस)। चुनाव आयोग में असहमति को लेकर आई मीडिया रिपोर्ट्स पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि असहमति लोकतंत्र की नीयत भी होती है और नियति भी होती है। यह असहमति केवल लोकतंत्र में ही संभव है, किसी तानाशाही व्यवस्था में यह संभव नहीं है। वहीं, विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि हार की हताशा में लोकतांत्रिक संस्थाओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, जो सफल नहीं होगी।
उन्होंने आईएएनएस से कहा, "चुनाव आयोग का सफर 1952 से शुरू हुआ और आज 2026 है। इसमें 18 से ज्यादा आम चुनाव हुए हैं, सैकड़ों विधानसभाओं के चुनाव हुए हैं। यह चुनाव आयोग तमाम तरह के चुनाव सुधारों का साक्षी रहा है और उसने चुनावों में अहम भूमिका भी निभाई है।"
उन्होंने कहा, "जहां तक सवाल है, मैं चुनाव आयोग का कोई प्रवक्ता नहीं हूं। चुनाव आयोग के अंदर जो असहमति की बातें आई हैं, उसका जवाब वह खुद देंगे। हालांकि मैं मानता हूं कि केवल असहमति के नाम पर आप किसी लोकतांत्रिक संस्था को ध्वस्त नहीं कर सकते, उसे नष्ट नहीं कर सकते।"
विपक्ष द्वारा लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जाने पर नकवी ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हार के बाद लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास और भ्रम फैलाने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा, "जो पराजित राजवंश के लोग हैं, वह हर समय लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास का माहौल, भय का माहौल और भ्रम का माहौल पैदा करने की कोशिश करते हैं। वे भय और भ्रम का जाल फैलाने की कोशिश में समय-समय पर तमाम मुद्दों को लेकर आते हैं। जब चुनाव हारेंगे तो कहेंगे कि हमें ईवीएम ने हरा दिया, चुनाव आयोग ने हरा दिया।"
नकवी ने कहा, "आप देश का सम्मान नहीं करेंगे, बिना जनाधार के बयान जारी करने लगेंगे, बिना जनाधार के जमींदारी करने लगेंगे तो यह देश में चलता नहीं है। इस देश ने बैलेट पेपर की लूट भी देखी है और ईवीएम की कुटाई भी देखी है।"
उन्होंने कहा कि विपक्ष हार के डिप्रेशन में है और इस हार की निराशा में आप लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त नहीं कर सकते, नष्ट नहीं कर सकते और बदनाम नहीं कर सकते। आप हार की हताशा में जो हुड़दंगी तमाशा करने में लगे हुए हैं, जो लोकतांत्रिक संस्थाओं को ध्वस्त करना चाहते हैं, जो जीवंत लोकतंत्र को हिंसा या अराजकता के जरिए बदनाम करने की कोशिश में लगे हुए हैं, उसमें सफलता नहीं मिलेगी।"
वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की पीडीए यात्रा को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्तार अब्बास नकवी ने तंज कसते हुए कहा कि पहले पीडीए की परिभाषा तो तय कर ली जाए।
उन्होंने कहा, "मेरी शुभकामनाएं हैं कि अखिलेश यात्रा निकालें। सरकार बनाने की तमन्ना में कोई हर्ज नहीं है लेकिन पहले पीडीए की परिभाषा तो तय कर लें। हर पड़ाव पर पीडीए की परिभाषा बदलते रहेंगे तो लोगों में बड़ा भ्रम होगा कि पी का क्या मतलब है, डी का क्या मतलब है, ए का क्या मतलब है। तो सबसे पहले इसकी परिभाषा को स्पष्ट कर लें।"
रायबरेली में अखिलेश यादव के श्रीकृष्ण के स्वरूप वाले पोस्टर को लेकर नकवी ने कहा, "ये गलतफहमी भारी पड़ती है। अभी से ही उनकी यात्रा में शॉर्ट सर्किट दिखाई पड़ रहा है और यही शॉर्ट सर्किट उनको झटके पर झटका दे रहा है।"
--आईएएनएस
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