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अरुण गोविल से दशकों पहले 'राम' बने थे प्रेम अदीब, शोभना समर्थ के साथ जोड़ी की बनी धार्मिक छवि

अरुण गोविल से दशकों पहले 'राम' बने थे प्रेम अदीब, शोभना समर्थ के साथ जोड़ी की बनी धार्मिक छवि
अरुण गोविल से दशकों पहले 'राम' बने थे प्रेम अदीब, शोभना समर्थ के साथ जोड़ी की बनी धार्मिक छवि

मुंबई, 9 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में भगवान राम का किरदार निभाने वाले कई कलाकारों को दर्शकों ने खूब पसंद किया। एक दौर ऐसा भी था जब पर्दे के राम को लोग सिर्फ अभिनेता नहीं मानते थे, उनकी तस्वीरें घरों में रखी जाती थीं और राम के रूप में उनकी छवि लोगों के मन में बस गई थी।

यह दौर अरुण गोविल के टीवी पर राम बनने से कई दशक पहले का था। उस समय प्रेम अदीब और शोभना समर्थ की जोड़ी ने राम और सीता के किरदार को इस तरह पर्दे पर उतारा कि दोनों की जोड़ी लोगों के बीच श्रद्धा भाव से जुड़ गई।

प्रेम अदीब का जन्म 10 अगस्त 1917 को सुल्तानपुर में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनके पिता, पंडित राम प्रसाद अदीब, पेशे से वकील थे। उनका परिवार पढ़ा-लिखा था और प्रेम अदीब से भी पढ़ाई पर ध्यान देने की उम्मीद थी। लेकिन प्रेम का मन फिल्मों में था। परिवार अभिनय के उनके सपने के खिलाफ था। इसके बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और फिल्मी दुनिया में जगह बनाने के लिए संघर्ष शुरू कर दिया। उन्होंने 1936 में फिल्मी सफर शुरू किया और 1938 की 'निराला हिंदुस्तान' में बतौर लीड एक्टर के तौर पर शुरुआत की।

प्रेम अदीब 1940 के दशक में हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेताओं में गिने जाते थे। उनकी पहचान एक बड़े स्टार के रूप में बन चुकी थी। लेकिन उनके करियर को सबसे बड़ी पहचान 1942 में आई फिल्म 'भरत मिलाप' से मिली। इस फिल्म में उन्होंने भगवान राम का किरदार निभाया और शोभना समर्थ ने सीता की भूमिका निभाई। अगले ही साल, 1943 में, दोनों 'राम राज्य' में फिर राम और सीता बने।

'भरत मिलाप' और 'राम राज्य' की सफलता के बाद प्रेम अदीब और शोभना समर्थ की जोड़ी सिर्फ फिल्मी जोड़ी नहीं रह गई। दर्शक उन्हें राम और सीता के रूप में पहचानने लगे। दोनों की तस्वीरें धार्मिक प्रकाशनों और कैलेंडरों में दिखाई देने लगीं। कई कैलेंडर मंदिरों में भी रखे जाते थे। ऐसे में जब राम का किरदार निभाने वाले कलाकारों की बात होती थीं, तो प्रेम अदीब का नाम सबसे पहले सामने आता था।

प्रेम अदीब और शोभना समर्थ ने रामायण से जुड़ी कहानियों में इस जोड़ी को आगे भी निभाया। 'राम बाण' में दोनों फिर राम और सीता के रूप में नजर आए। 1954 की 'रामायण' में भी दोनों ने राम और सीता की भूमिका निभाई। उनकी जोड़ी को दर्शकों ने इतना पसंद किया कि दोनों की पहचान इन किरदारों से गहराई से जुड़ गई।

प्रेम अदीब के राम वाले सफर की बात करें तो उन्होंने करीब आठ फिल्मों में भगवान राम का किरदार निभाया। 'भरत मिलाप', 'राम राज्य' और 'राम बाण' के अलावा 'राम विवाह', 'राम नवमी', 'राम-हनुमान युद्ध', 'राम लक्ष्मण' और 'राम भक्त विभीषण' जैसे नाम उनके राम वाले सफर से जुड़े हुए हैं।

प्रेम अदीब का जीवन लंबा नहीं रहा। 25 दिसंबर 1959 को मुंबई में 42 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु के बाद, 1960 में 'अंगुलीमाल' रिलीज हुई, जिसे उनकी आखिरी रिलीज फिल्मों में गिना जाता है।

--आईएएनएस

पीके/एएस

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