Samachar Nama
×

अरावली मॉर्फोलॉजिकल रिज में 473 पेड़ काटने वाली डीडीए की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया

नई दिल्ली, 5 जनवरी (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की उस याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है, जिसमें अरावली के मॉर्फोलॉजिकल रिज इलाके में 473 अतिरिक्त पेड़ काटने या स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी गई थी।
अरावली मॉर्फोलॉजिकल रिज में 473 पेड़ काटने वाली डीडीए की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया

नई दिल्ली, 5 जनवरी (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की उस याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है, जिसमें अरावली के मॉर्फोलॉजिकल रिज इलाके में 473 अतिरिक्त पेड़ काटने या स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी गई थी।

यह अनुमति केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल चिकित्सा संस्थान (सीएपीएफआईएमएस) के लिए सड़क चौड़ीकरण और बेहतर पहुंच के लिए मांगी गई है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि कोर्ट हड़बड़ी में कोई आदेश नहीं देगा, जब तक पिछले निर्देशों का पूरा अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो जाता।

सुनवाई के दौरान सीजेआई ने डीडीए से सवाल किया, "आप हिसाब दीजिए कि पहले 1,16,000 पेड़ों का क्या हुआ? नए पौधे कितने लगाए गए और उनमें से कितने जीवित बचे हैं?"

उन्होंने जोर देकर कहा कि एक दिन में एक लाख से अधिक पेड़ नहीं लगाए जा सकते। पहले जमीन की खुदाई और तैयारी पूरी करनी होगी। कोर्ट ने कहा, "हम तब तक कुछ भी नहीं होने देंगे, जब तक हम यह सुनिश्चित नहीं कर लेते कि हमारे निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं।"

डीडीए के वकील सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने बताया कि रिज जंगल के आसपास बाउंड्री वॉल का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और ग्रेप (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) की पाबंदियों के कारण 28 फरवरी तक काम पूरा होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि सड़क संकरी होने के कारण चौड़ीकरण जरूरी है, क्योंकि यहां सेना के लिए अस्पताल (सीएपीएफआईएमएस) है, जहां अभी केवल ओपीडी चल रही है और ट्रकों व अन्य वाहनों के लिए समायोजन आवश्यक है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अस्पताल की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि पहले के फैसले में इसकी मान्यता दी गई है, लेकिन संकरी सड़क के कारण यह कदम उठाना पड़ा। सड़क पर लगे पौधों को स्थानांतरित किया जा सकता है।

सीजेआई ने पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि अस्पताल की जरूरत को मान्यता है, लेकिन यहां लगभग 1,60,000 पेड़ हैं। पौधों की मृत्यु दर शून्य प्रतिशत होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि पीपल, नीम, जामुन, अमलतास जैसे ऐसे पेड़ लगाए जाएं जो जल्दी बड़े वृक्ष बन सकें। साथ ही, आजकल उगाए गए पेड़ों को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया जा सकता है।

याचिकाकर्ता के वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि वे अब पौधे रोपना चाहते हैं और यह प्रारंभिक चरण में है।

कोर्ट ने डीडीए को निर्देश दिया कि पूरी रिपोर्ट, अनुपालन की स्थिति और विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की जाए। बिना इनके कोई नई अनुमति नहीं मिलेगी। मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी। उस समय तक पेड़ कटाई या कोई अन्य गतिविधि पर पूर्ण रोक रहेगी।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

Share this story

Tags