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अराघची बोले 'ईरान पर हमला इकोसाइड’, क्या है ये शब्द और पहली बार कब हुआ था इस्तेमाल?

नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान में ईंधन भंडारण डिपो पर हुए हमलों को "इकोसाइड" बताया है। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा कि ऐसे हमलों से केवल सैन्य या आर्थिक नुकसान ही नहीं होता, बल्कि पर्यावरण और आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी लंबे समय तक प्रभाव पड़ सकता है। इस बयान के बाद "इकोसाइड" शब्द एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आखिर इसका मतलब क्या है और पहली बार कब ये प्रयोग में आया?
अराघची बोले 'ईरान पर हमला इकोसाइड’, क्या है ये शब्द और पहली बार कब हुआ था इस्तेमाल?

नई दिल्ली, 16 मार्च (आईएएनएस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान में ईंधन भंडारण डिपो पर हुए हमलों को "इकोसाइड" बताया है। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा कि ऐसे हमलों से केवल सैन्य या आर्थिक नुकसान ही नहीं होता, बल्कि पर्यावरण और आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी लंबे समय तक प्रभाव पड़ सकता है। इस बयान के बाद "इकोसाइड" शब्द एक बार फिर चर्चा में आ गया है। आखिर इसका मतलब क्या है और पहली बार कब ये प्रयोग में आया?

इकोसाइड का अर्थ है 'पर्यावरण का बड़े पैमाने पर विनाश।' जब किसी गतिविधि के कारण जंगल, नदियां, मिट्टी, हवा या पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर और लंबे समय तक नुकसान पहुंचता है, तो उसे इकोसाइड कहा जाता है। यह नुकसान जानबूझकर भी हो सकता है और लापरवाही के कारण भी। बड़े स्तर पर जंगलों की कटाई, समुद्र या नदियों में तेल और रसायनों का रिसाव, औद्योगिक प्रदूषण या युद्ध के दौरान ऐसी सैन्य कार्रवाई जिससे पर्यावरण को स्थायी क्षति पहुंचे—इन सभी स्थितियों को इकोसाइड के उदाहरण के रूप में देखा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो जब मानव गतिविधियों के कारण प्रकृति को व्यापक और गहरा नुकसान होता है, तो उसे इकोसाइड कहा जाता है।

इस शब्द की शुरुआत 1970 में अमेरिकी वैज्ञानिक आर्थर डब्ल्यू गैल्स्टन ने की थी। उस समय वियतनाम युद्ध के दौरान जंगलों को नष्ट करने के लिए बड़े पैमाने पर रासायनिक पदार्थों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इन रसायनों में सबसे कुख्यात था एजेंट ऑरेंज, जिसके कारण लाखों पेड़-पौधे नष्ट हो गए, मिट्टी और पानी प्रदूषित हो गए और लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ा। इस व्यापक पर्यावरणीय विनाश को देखकर गैल्स्टन ने इसे “प्रकृति की हत्या” जैसा बताया और इसी संदर्भ में “इकोसाइड” शब्द का प्रयोग किया।

आज भी इस शब्द को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। हाल ही में इजरायल ने तेहरान स्थित तेल ठिकानों को निशाना बनाया; इसके बाद दुनिया ने जो देखा, वह भयावह था। पूरा आसमान धुंए के गुबार से पट गया था, और फिर काली बारिश ने लोगों की सांस आफत में डाल दी। ईरान स्थित रेड क्रेसेंट सोसाइटी ने लोगों को अपना ख्याल रखने को कहा और बाहर निकलने से मना किया।

कई पर्यावरण विशेषज्ञ और संगठन चाहते हैं कि इकोसाइड को एक अंतरराष्ट्रीय अपराध घोषित किया जाए। इसके लिए इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट में इसे युद्ध अपराध या नरसंहार की तरह एक गंभीर अपराध के रूप में शामिल करने की मांग की जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो किसी देश, कंपनी या संगठन द्वारा बड़े पैमाने पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई संभव हो सकेगी।

जलवायु परिवर्तन, जंगलों की कटाई, समुद्री प्रदूषण और युद्धों के कारण बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच “इकोसाइड” शब्द का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इसे कानूनी अपराध का दर्जा मिलता है, तो सरकारों और कंपनियों पर पर्यावरण की रक्षा करने की जिम्मेदारी और अधिक स्पष्ट और मजबूत हो सकेगी।

--आईएएनएस

केआर/

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