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'अनुपमा' ने उठाया मर्दों के साथ होने वाले शोषण का मुद्दा, रुपाली बोलीं- औरतें नहीं, पुरुष भी होते शिकार

मुंबई, 17 फरवरी (आईएएनएस)। टीवी शो 'अनुपमा' में एक बार फिर समाज के अनदेखे और संवेदनशील मुद्दे को उठाता नजर आएगा। शो में मेकर्स ने पुरुषों के साथ होने वाले भावनात्मक और मानसिक उत्पीड़न को दिखाया है। यह दिखाता है कि घरेलू हिंसा और दुर्व्यवहार सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष भी इसका शिकार होते हैं।
'अनुपमा' ने उठाया मर्दों के साथ होने वाले शोषण का मुद्दा, रुपाली बोलीं- औरतें नहीं, पुरुष भी होते शिकार

मुंबई, 17 फरवरी (आईएएनएस)। टीवी शो 'अनुपमा' में एक बार फिर समाज के अनदेखे और संवेदनशील मुद्दे को उठाता नजर आएगा। शो में मेकर्स ने पुरुषों के साथ होने वाले भावनात्मक और मानसिक उत्पीड़न को दिखाया है। यह दिखाता है कि घरेलू हिंसा और दुर्व्यवहार सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरुष भी इसका शिकार होते हैं।

कहानी में मोती बा की भतीजी कीर्ति को बाहर से एक आदर्श पत्नी दिखाया गया है, जो अपने पति कपिल की अच्छे से देखभाल करती नजर आती है। लेकिन बंद कमरे में वह कपिल को मानसिक रूप से प्रताड़ित करती है, ब्लैकमेल और टॉर्चर करती है। कपिल इस सबके बारे में किसी से कह नहीं पाता, क्योंकि समाज में पुरुषों को पीड़ित मानने की सोच कम है और कीर्ति ने अपनी परफेक्ट इमेज इतनी मजबूत बना रखी है कि उसकी बात पर यकीन नहीं किया जाएगा।

अनुपमा, जो हमेशा सही के साथ खड़ी रहती हैं, कीर्ति के व्यवहार में कुछ गड़बड़ियां नोटिस करती हैं। वह कपिल के दर्द को समझती हैं और सिर्फ इसलिए कीर्ति का समर्थन नहीं करतीं क्योंकि वह एक महिला है। अनुपमा सच की तलाश में रहती हैं और परिवार के सामने कीर्ति के असली चेहरे को बेनकाब करने में जुट जाती है।

यह एपिसोड मैसेज देता है कि दुर्व्यवहार जेंडर से परे है और पीड़ित किसी भी जेंडर का हो सकता है। शो की लीड एक्ट्रेस रुपाली गांगुली ने इस थीम पर खुशी जताते हुए मेकर्स की तारीफ की। उन्होंने कहा, "अनुपमा के मेकर्स की तारीफ होनी चाहिए कि उन्होंने ऐसे टॉपिक उठाए जो समाज में अभी भी टैबू हैं। वह अनुपमा को अक्सर उन मुद्दों के लिए आवाज बनाते हैं, जो दबी रहती हैं। मुझे राजन शाही, दीपा शाही और डीकेपी प्रोडक्शंस के इस विजन का हिस्सा बनने पर गर्व है।"

रुपाली ने आगे कहा, "अनुपमा हमेशा समाज के मुद्दों पर बोलती आई है, चाहे किसान, दिवाली पर एडजस्टमेंट, आवारा जानवरों को खाना, गाय की सेवा या कुत्तों को रोटी खिलाना हो। अब यह ट्रैक पुरुषों के साथ गलत व्यवहार, घरेलू हिंसा और पति के शिकार होने जैसे विषयों पर बात कर रहा है। यह मेरे लिए बहुत दिल को छूने वाला और गर्व की बात है कि मुझे मेकर्स की इस सोच को आवाज देने का मौका मिला।"

--आईएएनएस

एमटी/एएस

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