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शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मिले अनिल बलूनी, केंद्रीय विद्यालय खोलने की रखी मांग

शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मिले अनिल बलूनी, केंद्रीय विद्यालय खोलने की रखी मांग
शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मिले अनिल बलूनी, केंद्रीय विद्यालय खोलने की रखी मांग

नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और गढ़वाल से सांसद अनिल बलूनी ने उत्तराखंड में केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की। उन्होंने उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण समेत तीन अन्य स्थानों पर केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग रखी।

भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "आज मैंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात की और शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभालने पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर, उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने की अपनी मांग को दोहराते हुए, मैंने मंत्री से इस दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया। साथ ही, मैंने रामनगर, यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र और देवप्रयाग में भी केंद्रीय विद्यालय स्थापित करने का अनुरोध किया।"

बलूनी ने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इस महत्वपूर्ण विषय पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने लिखा, "इन क्षेत्रों में केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना से स्थानीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे और यह पहाड़ी क्षेत्रों के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।"

अनिल बलूनी का कहना है कि पहाड़ के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिलना बहुत जरूरी है ताकि पलायन को रोका जा सके और पहाड़ में ही युवाओं के लिए अवसर पैदा किए जा सकें। केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना से शिक्षा के स्तर में सुधार के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे।

अनिल बलूनी लंबे समय से गैरसैंण में केंद्रीय विद्यालय की मांग उठाते रहे हैं। गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया है, लेकिन वहां अभी तक केंद्रीय विद्यालय जैसी बड़ी शैक्षणिक संस्था नहीं है। स्थानीय लोगों और छात्रों की भी यह लंबे समय से मांग रही है।

इसी तरह रामनगर, यमकेश्वर और देवप्रयाग जैसे पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में भी अच्छी शिक्षा के लिए छात्रों को दूर जाना पड़ता है। इन क्षेत्रों में केंद्रीय विद्यालय खुलने से न केवल स्थानीय छात्रों को फायदा होगा, बल्कि आसपास के गांवों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

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