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प्रेम संबंध से नाराज़ भाई ने बहन को पहाड़ से फेंक कर की हत्या, ड्रोन कैमरे में कैद हुई सनसनीखेज वारदात

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महाराष्ट्र के संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने अपनी नाबालिग बहन की महज इसलिए हत्या कर दी क्योंकि वह दूसरी जाति के युवक से प्रेम करती थी। समाजिक दबाव, पारिवारिक तनाव और झूठी ‘इज्जत’ के नाम पर 17 वर्षीय मासूम की जान ले ली गई। यह ‘ऑनर किलिंग’ की एक और बर्बर मिसाल बनकर उभरी है।

घटना कहां और कैसे हुई?

यह जघन्य वारदात संभाजीनगर के अंबड़ तालुका के शाहगढ़ इलाके की है। आरोपी ऋषिकेश तानाजी शेरकर (25 वर्ष) ने अपनी बहन को शाहगढ़ के पहाड़ों पर घुमाने के बहाने बुलाया और फिर 200 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। यह घटना उस वक्त हुई जब पहाड़ के नीचे एक स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंट हो रहा था और आयोजकों ने ड्रोन कैमरों से रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कर रखी थी।

ड्रोन कैमरे में कैद हुआ पूरा मंजर

संयोग से पूरी वारदात ड्रोन कैमरे में कैद हो गई। कैमरे में पहले भाई और बहन पहाड़ी की चोटी पर जाते दिखाई देते हैं, फिर आरोपी बहन को खाई में धक्का देता है और अकेले नीचे लौटता है। फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

पीड़िता पर बना रहा था रिश्ता तोड़ने का दबाव

मृतक किशोरी का दूसरी जाति के एक युवक से प्रेम संबंध था। परिवार वालों ने उसे इस रिश्ते को खत्म करने के लिए बार-बार समझाया, लेकिन लड़की अपनी पसंद पर अडिग रही। पुलिस के मुताबिक, लड़की ने परिवार की प्रताड़ना से तंग आकर पुलिस में भी शिकायत की थी और अपनी जान को खतरा बताया था। इसके बाद उसे उसके चाचा के घर वल्दगांव भेज दिया गया, ताकि वह प्रेमी से दूर रहे। लेकिन वहां मौजूद चाचा का बेटा ऋषिकेश, जो खुद ही इस रिश्ते से नाराज़ था, उसे बहाने से शाहगढ़ पहाड़ घुमाने ले गया और हत्या कर दी।

पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार, जांच जारी

ड्रोन फुटेज और घटनास्थल पर मौजूद सबूतों के आधार पर आरोपी ऋषिकेश को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है कि क्या इस हत्या में कोई और भी शामिल था और क्या घटना पूर्व नियोजित थी। पुलिस के अनुसार, मामला ऑनर किलिंग का है और इसके पीछे जातिगत पूर्वाग्रह, सामाजिक बदनामी का डर और पितृसत्तात्मक सोच काम कर रही है।

समाज के लिए चेतावनी: कब तक रिश्तों के नाम पर बहेगा खून?

यह वारदात एक बार फिर दर्शाती है कि हमारे समाज में आज भी प्रेम, स्वाभिमान और स्वतंत्रता को जाति, प्रतिष्ठा और पारिवारिक नियंत्रण के तराजू में तौला जाता है। युवतियां, खासकर नाबालिग लड़कियां, अपनी पसंद की कीमत जान देकर चुका रही हैं। यह सवाल उठता है कि जब एक लड़की पुलिस को खतरे की सूचना देती है, तो क्या उसका संरक्षण पर्याप्त रूप से किया जाता है? क्या उसकी शिकायतों को गंभीरता से लिया गया?

जरूरत है सख्त सामाजिक और कानूनी बदलाव की

यह केस न सिर्फ ऑनर किलिंग का शर्मनाक उदाहरण है, बल्कि यह दिखाता है कि टेक्नोलॉजी—जैसे ड्रोन कैमरा—कई बार ऐसे अपराधों के खिलाफ सबूत के तौर पर अहम भूमिका निभा सकती है।

  • ऑनर किलिंग को लेकर सख्त कानून लागू करने की जरूरत है

  • पुलिस को पीड़िता की शिकायत पर संवेदनशील कार्रवाई करनी चाहिए

  • समाज को भी प्रेम और अंतरजातीय विवाहों के प्रति दृष्टिकोण बदलने होंगे

निष्कर्ष

17 साल की मासूम को सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवानी पड़ी क्योंकि उसने अपनी पसंद से प्यार किया। जब तक समाज ‘इज्जत’ और ‘परंपरा’ के नाम पर औरतों की स्वतंत्रता कुचलता रहेगा, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे। जरूरत है कि हम चेतें – इससे पहले कि फिर कोई बहन, कोई बेटी इस क्रूर सोच की बलि चढ़ जाए।

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