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Anant Ambani: न्यूकैसल यूनिवर्सिटी में मिली बड़ी जिम्मेदारी, सस्टेनेबिलिटी के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस नियुक्त
 

Anant Ambani: न्यूकैसल यूनिवर्सिटी में मिली बड़ी जिम्मेदारी, सस्टेनेबिलिटी के प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस नियुक्त

रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी को यूनाइटेड किंगडम की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने सस्टेनेबिलिटी का प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस नियुक्त किया है। यह पद उन्हें औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, ग्रीन एनर्जी और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े उनके काम के आधार पर दिया गया है।
नई भूमिका में अनंत अंबानी छात्रों के साथ अपने औद्योगिक अनुभव साझा करेंगे और उन्हें ग्रीन एनर्जी, सस्टेनेबिलिटी और ऊर्जा परिवर्तन से जुड़े विषयों की जानकारी देंगे।
2035 तक नेट कार्बन जीरो का लक्ष्य
अनंत अंबानी रिलायंस इंडस्ट्रीज में ऊर्जा परिवर्तन से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कंपनी के 2035 तक नेट कार्बन जीरो बनने के रोडमैप पर भी वह काम कर रहे हैं।
उनकी भूमिका में स्वच्छ ऊर्जा, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन और नई ऊर्जा तकनीकों से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।
क्या होता है Professor of Practice?
प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस एक ऐसा अकादमिक पद है, जिसके जरिए इंडस्ट्री और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में लंबा अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों को विश्वविद्यालयों से जोड़ा जाता है।
पारंपरिक प्रोफेसर पदों से अलग इस भूमिका के लिए सामान्य तौर पर पीएचडी, पीयर-रिव्यूड रिसर्च पेपर या अकादमिक टेन्योर जैसी अनिवार्य शर्तें नहीं होतीं। इसमें व्यावहारिक अनुभव और संबंधित क्षेत्र में विशेषज्ञता को महत्व दिया जाता है।
ऑक्सफोर्ड सैद, वारविक, क्रैनफील्ड और हार्वर्ड समेत कई संस्थानों में इस तरह के पदों के जरिए इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स को छात्रों से जोड़ा गया है।
भारत में भी UGC ने शुरू की यह श्रेणी
भारत में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC ने 2022 में Professor of Practice की व्यवस्था शुरू की थी। इसके तहत उद्योग, व्यवसाय और अन्य पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी लोगों को विश्वविद्यालयों में छात्रों को पढ़ाने और मार्गदर्शन देने का अवसर मिलता है।
इस व्यवस्था में विशेषज्ञों के व्यावहारिक अनुभव को अकादमिक शिक्षा के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया है।


वंतारा में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा काम
अनंत अंबानी के सस्टेनेबिलिटी से जुड़े कामों में जामनगर स्थित वंतारा भी शामिल है। यह करीब 3,500 एकड़ में फैला वन्यजीव संरक्षण और रेस्क्यू केंद्र है।
यहां हाथियों समेत कई वन्यजीवों के लिए उपचार, देखभाल और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध हैं। वंतारा के अनुसार, केंद्र में शेर, बाघ, तेंदुए, गैंडे और संकटग्रस्त सरीसृपों सहित बड़ी संख्या में वन्यजीवों के पुनर्वास का काम किया गया है।
यहां करीब 650 बेड वाला मल्टी-स्पेशियलिटी वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल भी मौजूद है।
ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट पर भी फोकस
अनंत अंबानी गुजरात के जामनगर में विकसित किए जा रहे धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स से भी जुड़े हैं। करीब 5,000 एकड़ में बन रहे इस परिसर में सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रोलाइजर, एडवांस्ड बैटरी स्टोरेज और फ्यूल सेल सिस्टम से संबंधित गीगा-फैक्ट्रियां शामिल हैं।
रिलायंस के मुताबिक, इस इंटीग्रेटेड सोलर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम का लक्ष्य 2030 तक 100 गीगावॉट सोलर पावर की तैनाती से जुड़ा है। वहीं, ग्रीन हाइड्रोजन पहल में उत्पादन लागत को 1 डॉलर प्रति किलोग्राम के बेंचमार्क तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
सस्टेनेबिलिटी पहल के तहत जामनगर में औद्योगिक वनीकरण भी किया जा रहा है, जहां कंपनी के अनुसार 1 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए गए हैं।

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